SSA : वेतन दें या भवन सुधारें

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SSA : वेतन दें या भवन सुधारें

एसएसए के बजट का 88 फीसदी वेतन पर ही खर्च, भवनों के लिए कम पड़ रहा बजट

सर्वशिक्षा अभियान (SSA) के तहत आठवीं तक की स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए गठित किए गए राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद का काम इन दिनों शिक्षकों को वेतन बांटने तक सीमित हो गया है। परिषद के पांच साल के बजट के आंकड़ों के देखा जाए तो 80 से 88 फीसदी बजट तो केवल वेतन पर ही खर्च हो रहा है।

स्कूलों में कक्षा कक्ष और भवन निर्माण के काम का बजट एक तिहाई रह गया है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग को आए दिन स्कूलों में कमरों की कमी की शिकायतें रही है। प्रदेश में 1487 स्कूल ऐसे हैं जहां भवनों की जरूरत है। ऐसे में अब परिषद के काम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पिछले सत्र 2015-16 में एसएसए का बजट 3540 करोड़ रुपए था। इसमें से 87 फीसदी हिस्सा यानी 3112 करोड़ रुपए तो केवल वेतन पर ही खर्च किया गया। सत्र 2014-15 में निर्माण कार्यों के लिए 226 करोड़ रुपए का बजट दिया गया था। इस बजट में भारी कमी करते हुए सत्र 2015-16 में यह बजट केवल 90 करोड़ रुपए तक सीमित हो गया।

एसएसए के मद में प्रदेश के स्कूलों में 1 लाख शिक्षक काम कर रहे हैं। इन शिक्षकों की सेलेरी देने की जिम्मेदारी एसएसए है। एसएसए में सरकार ने 1 आईएएस और 3 आरएएस सहित कई प्रिंसिपल,व्याख्याताओं को लगा रखा है। इतना बड़ा सेटअप होने के बावजूद एसएसए का काम केवल शिक्षकों का वेतन जारी करने तक सीमित हो गया है।

एसएसए की ही एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के 55605 स्कूल हैं। इनमें से 1487 स्कूलों को भवनों की जरूरत है। भवनों की जरूरत वाले स्कूलों में 138 तो किराए के भवन में चल रहे हैं,जबकि 774 स्कूल ऐसे हैं जो किराए के भवन में तो है,लेकिन किराया फ्री है। इनके अलावा 575 स्कूल ऐसे हैं जिनके पास खुद का भवन ही नहीं है।

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