बेहतर नौकरी सरकारी बैंक में या प्राइवेट बैंक में Career in Private Banks v/s Public Sector Banks

Govt Jobs bank jobs How to prepare for Bank Jobs.

बेहतर नौकरी सरकारी बैंक में या प्राइवेट बैंक में

Career in Private Banks v/s Public Sector Banks

बैंकिंग क्षेत्र का जिस तेजी से विकास हो रहा है, युवाओं का झुकाव भी बैंक (Banks) की नौकरी की ओर बढ़ रहा है। प्राइवेट (Private Banks) और पब्लिक सैक्‍टर (Public Sector Banks) दोनों ही क्षेत्रों की बैंक बहुत तेजी से विस्‍तार कर रही हैं। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि किस क्षेत्र की बैंक में कॅरियर बनाया जाए।

जो लोग इस क्षेत्र से संबंधित हैं, उनके लिए भी कई बार यह निर्णय करना कुछ मुश्किल होता है, ऐसे में फ्रेशर्स के लिए तो इस बारे में अपनी कोई स्‍पष्‍ट राय बना ही नहीं पाते हैं। इस लेख में हम युवा प्रोफेशनल्‍स के सामने उपलब्‍ध विकल्‍पों के सकारात्‍मक और नकारात्‍मक पहलुओं को स्‍पष्‍ट करने का प्रयास करेंगे।

देखा जाए तो दोनों ही क्षेत्र अपने आप में  आम जनता से जुड़े हुए संगठन हैं और देश के वित्‍तीय क्षेत्र में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। दोनों क्षेत्रों की अपनी विशेषताएं और कमियां हैं, ऐसे में हर किसी को अपनी क्षमताओं और जरूरतों को ध्‍यान में रखकर ही क्षेत्र का चुनाव करना होगा।

सीखने का माहौल

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास बहुत बड़ा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और फण्‍ड होने के कारण वे अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए बड़ा खर्च करती हैं। उन्‍हें लगातार अपडेट रखने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। वहीं प्राइवेट बैंक यह चाहते हैं कि उनके कर्मचारी काम करने के दौरान ही सीखते जाएं। चाहे नए कर्मचारी ही क्‍यों न हों, उनके लिए यही एक विकल्‍प होता है कि वे फील्‍ड में काम करें और आगे बढ़ें। यही नहीं प्राइवेट बैंक में उस कर्मचारी को अधिक महत्‍व दिया जाएगा तो पहले से काम को जानता हो। इसके साथ ही प्राइवेट बैंक आवश्‍यकता होने पर अपने कर्मचारी को प्रशिक्षण के लिए बड़े मैनेजमेंट इंस्‍टीट्यूट में भेजने का प्रयास भी करता है, लेकिन सार्वजनिक बैंकों में यह परिपाटी नहीं है।

कॅरियर ग्रोथ और रिटर्न

इस मामले में प्राइवेट बैंक कहीं आगे है। सार्वजनिक बैंकों में जहां कॅरियर ग्रोथ का मतलब होता है कि कर्मचारी ने जितना अधिक समय बैंक में व्‍यतीत किया है, उसी के अनुसार उसकी सीनियर्टी बढ़ती जाएगी और समय आने पर उसे प्रमोशन मिल जाएगा। वहीं प्राइवेट बैंक में सीनियर्टी पूरी तरह कर्मचारी के काम के प्रदर्शन पर निर्भर होती है। प्राइवेट बैंक का कर्मचारी बहुत अच्‍छा प्रदर्शन कर कुछ ही समय में बहुत महत्‍वपूर्ण पद और तनख्‍वाह पा सकता है। वहीं सार्वजनिक बैंक का कर्मचारी समय आने पर सीनियर्टी मिलने पर तनख्‍वाह में बढ़ोतरी पाता है।

अन्‍य लाभ और भत्‍ते

सार्वजनिक बैंक की सबसे बड़ी खासियत जॉब सिक्‍युरिटी है। अगर कोई कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन नहीं भी कर पा रहा है तो समय बीतने के साथ उसकी सीनियर्टी बनती है और वह प्रमोशन पा लेता है। बैंक उस बंदे को निकालता नहीं है। वहीं प्राइवेट बैंक में कठोर प्रतिस्‍पर्द्धा के चलते अगर कर्मचारी का प्रदर्शन्‍ संतोषजनक नहीं है तो उसकी ग्रोथ तो बंद होगी ही नौकरी पर भी संकट मंडराने लगेगा। इसके साथ ही सार्वजनिक बैंक के कर्मचारियों को कम ब्‍याज पर ऋण, जमाओं पर अधिक ब्‍याज, पेंशन पैकेज आदि कई सुविधाएं मिलती हैं। वहीं प्राइवेट बैंक में अच्‍छी परफार्मेंस होने पर तेजी से प्रमोशन, तनख्‍वाह में तेज बढ़ोतरी, रिवार्ड और एप्रीशिएशन मिलता है। इसके लिए कर्मचारी को उम्र या सिनियर्टी का इंतजार नहीं करना पड़ता।

सार्वजनिक बैंक और प्राइवेट बैंक में अंतर को लेकर नीचे चार्ट दिया गया है, इसे देखकर आप अनुमान कर सकते हैं कि किस क्षेत्र में क्‍या लाभ और हानि हैं।

        सार्वजनिक बैंक           प्राइवेट बैंक
प्रशिक्षण कर्मचारियों के प्रशिक्षण में बहुत अधिक निवेश किया जाता है नए लोगों से काम करने के दौरान ही सीखने की उम्‍मीद की जाती है
कॅरियर ग्रोथ धीमी रफ्तार सापेक्ष तौर पर तेज रफ्तार
प्रमोशन का आधार सीनियर्टी के आधार पर मैरिट के आधार पर
तनख्‍वाह तनख्‍वाह में धीमी बढ़ोतरी अच्‍छा काम करने पर तेजी से तनख्‍वाह बढ़ती है
जॉब सिक्‍युरिटी बहुत अधिक केवल अच्‍छे परफारर्मेंस वाले कर्मचारियों की जॉब की सिक्‍योर रहती है

 

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