15 लॉ कॉलेजों में 3600 छात्रों के प्रवेश पर रोक

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15 लॉ कॉलेजों में 3600 छात्रों के प्रवेश पर रोक

प्रदेश के 15 लॉ कालेजों पर मान्यता का संकट है। इसके चलते फर्स्ट ईयर में अक्टूबर तक प्रवेश नहीं हो सके हैं। इन कॉलेजों ने मान्यता के लिए संबंधित यूनिवर्सिटी बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से संपर्क किया। वहां से जवाब मिला कि संसाधन मापदंड के मुताबिक नहीं हैं। बिल्डिंग है स्टाफ पर्याप्त है। सरकार पहले यह व्यवस्था करे। मान्यता नहीं मिलने से प्रदेशभर में 3600 स्टूडेंट्स भटक रहे हैं। निजी कॉलेजों में एलएलबी प्रथम वर्ष में फीस तीन से चार गुना तक है।

ये लॉ कॉलेज अब तक यूनिवर्सिटी बार काउंसिल ऑफ इंडिया को संसाधन जल्द जुटा लेने की कहते हुए अस्थाई मान्यता लिए जा रहे थे। जब हालात नहीं सुधरे तो इस बार निरीक्षण फीस लेकर भी मान्यता देने से काउंसिल ने इनकार कर दिया। भीलवाड़ा के राजकीय विधि कॉलेज को ही लें। वर्तमान में करीब 350 स्टूडेंट्स हैं। इनके लिए लेक्चरर के 10 पद स्वीकृत हैं।

फिलहाल प्रिंसिपल समेत तीन का स्टाफ है। नॉन टीचिंग स्टाफ के 10 पदों में से केवल एक यूडीसी है। लाइब्रेरियन, पीटीआई समेत अन्य के पद खाली हैं। एक लेक्चरर राकेश दामोर एक साल से उदयपुर में डेपुटेशन पर हैं। इस सत्र में उनका डेपुटेशन खत्म हो गया है लेकिन उदयपुर से रिलीव नहीं किया जा रहा। प्रिंसिपल डॉ.वीडी भटनागर फरवरी में रिटायर हो जाएंगे। इसके बाद नए प्रिंसिपल कब तक आएंगे इस बारे में भी कुछ कहा नहीं जा सकता।

वर्ष 2014 से पहले इसलिए मिलती थी मान्यता

प्रिंसिपल डॉ. भटनागर ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले अनुभव वाले वकील को संविदा पर लगाने की व्यवस्था थी। इसके बाद सरकार ने नियम बदल दिया यूनिवर्सिटी ने भी ऑब्जेक्शन कर दिया। तब लेक्चरर से ही पढ़वाना तय हुआ। वहीं कुछ साल तो सरकार ने बीसीआई को आश्वासन दिया कि जल्दी लेक्चरर की लगा लेंगे।

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