सीकर : 72 दिव्‍यांग छात्रों के लिए एक शिक्षक

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सीकर : 72 दिव्‍यांग छात्रों के लिए एक शिक्षक

सीकर : शिक्षा का अधिकार कानून सामान्‍य बच्‍चों के लिए ही 30 से 40 बच्‍चों पर एक शिक्षक की जरूरत बताता है, वहीं दिव्‍यांगों के लिए कतिपय अधिक शिक्षकों की जरूरत पड़ती होगी, लेकिन स्थिति इसके उलट है। सीकर के माध्‍यमिक एवं उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालयों में नामांकित 72 दिव्‍यांग छात्रों के लिए महज एक प्रशिक्षित शिक्षक कार्यरत है।

आधा सत्र बीत जाने तक इन छात्रों को शिक्षक नहीं मिल पाए हैं। यह बच्चे इस वर्ष बिना पढ़ाई किए कैसे परीक्षा देंगे। ऐसे दिव्‍यांग विद्यार्थियों की शिक्षा भगवान भरोसे है। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में माध्यमिक शिक्षा में 22 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्यनरत हैं। लेकिन शिक्षा विभाग शिक्षकों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जनवरी महीने में सभी ब्लॉकों में जुलाई तक विशेष शिक्षक लगाने का दावा किया था। खुद शिक्षामंत्री ने भी विशेष शिक्षक संघ प्रतिनिधियों से यह बात कही थी। आयोग का तर्क है कि नवम्बर में परीक्षा कराने पर विचार किया जा रहा है। दूसरी तस्वीर यह है कि अब परीक्षा होने पर तो अगले सत्र से ही शिक्षक मिल सकेंगे।

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने आठ महीने पहले विशेष शिक्षकों के 211 पदों की भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। लेकिन अभी तक अभी तक परीक्षा कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। जबकि सामान्य शिक्षकों के आवेदन चार महीने बाद मांगे गए थे। आयोग ने सामान्य शिक्षा की दितीय श्रेणी भर्ती परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इस कारण विशेष शिक्षकों में भी आयोग के प्रति काफी गुस्सा है।


कोई व्‍यवस्‍था नहीं

आठ ब्लॉकों में 72 से अधिक बच्चे सरकारी विद्यालयों में अध्यनरत है। कक्षा नवीं से बारहवीं तक के दिव्यांगों को पढ़ाने के लिए जिले में एक ही शिक्षक है। शिक्षकों की भर्ती होने पर सभी ब्लॉकों में तीन-तीन शिक्षक लगाए जाएंगे। संविदा के तौर पर विशेष शिक्षक लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

रामचंद्र पिलानियां, एडीपीसी,  राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान

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