संसाधनों की कमी, विवि के सात हजार छात्रों का पुनर्मूल्यांकन नहीं

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संसाधनों की कमी, विवि के सात हजार छात्रों का पुनर्मूल्यांकन नहीं

परीक्षा परिणाम को दुरुस्त करने में उलझे महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय में अभी तक पुनर्मूल्यांकन कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। जबकि नियम एक माह में परीक्षा परिणाम जारी करने का है,किंतु अभी तक फार्मों को देखा तक नहीं गया है। इससे करीब 7 हजार विद्यार्थी असमंजस में हैं। क्योंकि पुनर्मूल्यांकन परिणाम नहीं आने से वे आगे के बारे में कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

पुनर्मूल्यांकन का नियम आवेदन की अंतिम तिथि के बाद एक माह तक परिणाम जारी करने का है। ब्रज विश्वविद्यालय द्वारा सभी परीक्षा परिणाम जारी कर दिए गए हैं। पहला परिणाम बीए का 4 सितंबर को जारी हुआ था। जिसके पुनर्मूल्यांकन आवेदन 4 अक्टूबर तक लिए गए, किंतु इनके किसी भी विद्यार्थी की उत्तरपुस्तिका की जांच अभी प्रारंभ नहीं हुई है। जबकि दो माह होने को हैं। वैसे इस मामले में विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रकोष्ठ ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कहना है कि हमारे पास इतने संसाधन नहीं है कि हम समय पर पुनर्मूल्यांकन करा सकें। क्योंकि परीक्षा विभाग में मात्र पांच आदमी का स्टाफ हैं।

ऐसे में परीक्षा के करीब 2000 पैकेटों से विषय बार उत्तर पुस्तिकाओं को तलाशना,रोल नंबर हटाकर उनके कोड डालना,पूर्व में दर्ज नंबरों पर चिट चिपकाना,कवर पेज काटना,जांच कराकर फिर से परिणाम दुष्कर कार्य है।

विश्वविद्यालय की इस बेबसी के आगे विद्यार्थी ज्यादा मजबूर हैं। क्योंकि पुनर्मूल्यांकन परिणाम नहीं आने से आगे की पढाई प्रभावित हो रही है। अलबत्ता,एमएससी में आए आवेदनों का पुनर्मूल्यांकन कार्य जरूर पूरा हो गया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले की शिकायत खुद छात्र संगठन भी कर चुके हैं।

किसमें कितने आवेदन

बीएमें सबसे अधिक करीब 5 हजार आवेदन आए हैं। इसमें राजनीति विज्ञान और भूगोल विषय के सर्वाधिक हैं। इसके अलावा विज्ञान और कामर्स में करीब 2 हजार आवेदन जमा हुए हैं। विज्ञान संकाय में सर्वाधिक कैमिस्ट्री तथा कामर्स में ईएएफएम में ज्यादातर पुनर्मूल्यांकन फार्म जमा हुए हैं। हालांकि इसका सबसे अधिक नुकसान खुद अभ्यर्थियों को ही हो रहा है।

धौलपुर भरतपुर के 112 कॉलेजों का फिर बनेगा टीआर

बीएससीके मैथ मैट्रिक्स के सैकंड पेपर में फेल हो चुके विद्यार्थियों को अगली कक्षा के लिए मान्य किए जाने के फैसले के बाद फिर से विश्वविद्यालय प्रशासन को ट्रिब्यूनल रजिस्टर तैयार कराने पड़ रहे हैं। क्योंकि बीएससी का टीआर बनवा कर भरतपुर धौलपुर जिले के 112 कालेजों को पहले ही भिजवा दिया गया था।

कुलपति के निर्देशों के बाद फिर से ट्रिब्यूनल रजिस्टर तैयार कराया जा रहा है। क्योंकि जो विद्यार्थी फेल हो चुके हैं उन्हें सैकंड ईयर के लिए आन रिकार्ड एलिजिबल घोषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के साफ्टवेयर की गलती से मैथ मैट्रिक्स में सभी छात्रों के32 नंबर आए थे,जिसके आधार पर बहुत से विद्यार्थियों ने निजी कालेजों में भी मोटी फीस देकर सैकंड ईयर में प्रवेश ले लिया।

किंतु बाद में बने टीआर में अधिकांश विद्यार्थियों मैथ मैट्रिक्स में फेल हो जाने से विद्यार्थियों में नाराजगी थी,क्योंकि उनकी फीस कालेज वाले लौटने को तैयार नहीं थे। साथ ही तीन सैकंड ईयर की पढ़ाई भी कर ली थी। छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने यह निर्णय लिया था।

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