शैक्षिक गुणवत्ता के लिए 5वीं और 8वीं की परीक्षा प्रारंभ होगी

shivira shiksha vibhag rajasthan November 2016 shiksha.rajasthan.gov.in district news DPC, RajRMSA, RajShiksha Order, rajshiksha.gov.in, shiksha.rajasthan.gov.in, Shivira Panchang February 2017, अजमेर, अभिनव शिक्षा, अलवर, उदयपुर, करौली, कोटा, गंगानगर, चित्तौड़गढ़, चुरू, जयपुर, जालोर, जैसलमेर, जोधपुर, झालावाड़, झुंझुनू, टोंक, डीपीसी, डूंगरपुर, दौसा, धौलपुर, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, प्राइमरी एज्‍युकेशन, प्राथमिक शिक्षा, बाड़मेर, बारां, बांसवाड़ा, बीकानेर, बीकानेर Karyalaye Nirdeshak Madhyamik Shiksha Rajisthan Bikaner, बूंदी, भरतपुर, भीलवाड़ा, माध्‍यमिक शिक्षा, मिडल एज्‍युकेशन, राजसमन्द, शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा निदेशालय, शिक्षा में बदलाव, शिक्षा में सुधार, शिक्षा विभाग राजस्‍थान, सरकार की भूमिका, सवाई माधोपुर, सिरोही, सीकर, हनुमानगढ़

शैक्षिक गुणवत्ता के लिए 5वीं और 8वीं की परीक्षा प्रारंभ होगी

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने राजस्थान को अच्छी शिक्षा का केन्द्र बनने के लिए बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्यों की यह मांग रही है कि शैक्षिक गुणवत्ता के लिए 5वीं और 8वीं की परीक्षा प्रारंभ की जाए। इसलिए हमने यह निर्णय लिया है कि अगले संसद सत्र में 5वीं और 8वीं की परीक्षा प्रारंभ करने का अधिकार राज्यों को देने के लिए कार्यवाही की जाएगी।

उन्‍होंने राजस्थान में मनरेगा के तहत विद्यालय खेल मैदान निर्माण के हुए कार्यों को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि राजस्थान की तर्ज पर देशभर में इस योजना को लागू किया जाएगा।

श्री जावडेकर आज यहां खासाकोठी में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार सभी राज्यों को साथ लेकर चलने की नीति पर कार्य हर रही है। उद्देश्य यही है कि देशभर में अच्छी शिक्षा का प्रसार हो।

उन्होंने कहा कि देशभर में प्राथमिक शिक्षा के अंतर्गत ‘लर्निंग आउटकम’ के प्रावधानों को नियमों में रखकर बच्चों को लाभान्वित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे यह पता चल सकेगा कि पहली कक्षा, दूसरी कक्षा और तीसरी कक्षा आदि के बाद विद्यार्थियों को क्या-क्या अपेक्षित पढ़ाई करवाई जानी जरूरी है। उन्होंने कहा केन्द्र सरकार का यह लक्ष्य है कि सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि हो। मानव संसाधन विकास मंत्री ने शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी दिए कि वे अच्छी शिक्षा देने के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहित करने की नीति पर कार्य करें। उन्होंने शिक्षा में नवाचार अपनाते हुए बच्चों में सृजनात्मक क्षमता बढ़ाने जाने पर भी जोर दिया।

उन्हाेंने कहा कि अब तक 22 राज्यों में शिक्षा क्षेत्र में किए गए प्रयासों की उन्होंने वहां जाकर समीक्षा की है और यह सुखद है कि राजस्थान में शैक्षिक गुणवत्ता के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। उन्होंने राज्य में बीएड कॉलेजों के अभ्यर्थियों को सरकारी विद्यालयों में ही शिक्षण करवाने के निर्णय को भी अनुकरणीय बताया तथा कहा कि राजस्थान बीमारू से विकसित राज्यों की श्रेणी में इसीलिए आ गया है कि यहां शिक्षा क्षेत्र में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए कार्य किया गया है।

उन्होंने प्रदेश में भामाशाहों के सहयोग से विद्यालयों में 50 करोड़ रुपये की राशि से विकास कार्य करवाए जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। श्री जावडेकर ने कहा कि बच्चों को सिखाने के लिए विद्यालयाें जो कार्य हो रहा है, उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। शिक्षकों, छात्र-छात्राओं से शिक्षण के संबंध में नियमित फीडबैक भी लिया जाए। यदि कहींं अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है तो उसे भी लागू करने के प्रयास किए जाएं।

उन्होंने गैर सरकारी संगठनों द्वारा किए गए शिक्षा क्षेत्र के अच्छे प्रयासों को भी देखे जाने, विद्यालयों में साफ-सफाई और स्वच्छता पर भी ध्यान देने आदि पर जोर दिया।

राजस्थान में 15 लाख की नामांकन वृद्धि, रिक्तियां 10 प्रतिशत रहना महत्वपूर्ण

बैठक में राजस्थान में पंचायत स्तर पर उत्कृष्ट, आदर्श विद्यालयों की स्थापना, राजकीय विद्यालयों में 15 लाख विद्यार्थियों के नामांकन वृद्धि, शिक्षकों की बड़ी संख्या में पदोन्नति और पारदर्शिता से पदस्थापन, अपनी बेटी योजना और छात्राओं को प्रोत्साहन दिए जाने के हुए कार्यों, शिक्षक प्रशिक्षण के अपनाए गए तरीकों और शिक्षकों की रिक्तियां मात्र 10 प्रतिशत ही रहने के लिए उठाए गए कदमों की विशेष रूप से सराहना की तथा कहा कि शिक्षा क्षेत्र के यह ऎसे कदम है जिन्हें दूसरे राज्यों को भी अपनाना चाहिए।

शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में शैक्षिक उन्नयन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली कक्षा में प्रवेश की आयु 6 से घटाकर 5 वर्ष करने का निर्णय जहां किया गया है वहीं शिक्षक-अभिभावक बैठकों को प्रारंभ कर शैक्षिक गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता मेंं रखा गया है।

प्रो. देवनानी ने कहा कि राज्य में 13 हजार 500 विद्यालयों में संस्कृत के पद सृजित किए गए हैं। भामाशाहों के सहयोग से राज्य के विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार अपनाते हुए पाठ्यक्रमों में गुणात्मक परिवर्तन के लिए भी प्रयास किए गए हैं।

इससे पहले शिक्षा विभाग के शासन सचिव श्री नरेशपाल गंगवार ने राजस्थान में विभिन्न स्तरों पर क्रियान्वित शिक्षा योजनाओं और उनसे शैक्षिक गुणवत्ता के लिए किए गए प्रयासों और आए परिणामों पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री अपनी बेटी योजना के तहत छात्राओं को लाभान्वित करने तथा मनरेगा से विद्यालयों में खेल मैदानों के निर्माण, स्वामी विवेकानंद, उत्कृष्ट और आदर्श विद्यालयों की स्थापना आदि के बारे में भी विस्तार से बताया।

संस्कृत शिक्षा के प्रमुख शासन सचिव श्री संजय दीक्षित ने संस्कृत शिक्षा के बारे में अवगत कराया। सर्व शिक्षा अभियान के आयुक्त श्री जोगाराम ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा क्षेत्र में हुए गुणवत्ता प्रयासों के बारे में बताया।

SHARE