शिक्षा क्षेत्र में विकास के लिए शोध एवं परिवर्तन जरूरी -शिक्षा राज्य मंत्री

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शैक्षिक अनुसंधान की प्रविधियांं’ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

शिक्षा क्षेत्र में विकास के लिए शोध एवं परिवर्तन जरूरी – शिक्षा राज्य मंत्री

शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा है कि शिक्षा क्षेत्र में विकास की अनिवार्यता है कि शोध एवं परिवर्तन को इसमें निरंतर जारी रखा जाए। उन्होंने विद्यालयों में शिक्षण के अंतर्गत विद्यार्थियों को ज्ञान संपन्न करने के साथ ही उन्हें विषय से जुड़ी भावनाओं से भी जोड़े जाने पर जोर दिया।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में भावनात्मक और आध्यात्मिक तत्वों को आवश्यक बताते हुए कहा कि इसी से विद्यार्थी में नवीन ज्ञान का प्रभावी रूप में संप्रेषण हो सकता है। प्रो.देवनानी आज यहां केशव विद्यापीठ, जामडोली में शैक्षिक अनुसंधान की प्रविधियाँ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षा में अनुसंधान को अपनाए जाने के साथ ही तर्क आधारित ज्ञान का विकास किए जाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में पाठ्यक्रम परिवर्तन का कार्य तर्क आधार पर किया गया हैं। हमने पाठ्यक्रम में 200 से अधिक वीर-वीरांगनाओं के इतिहास को जोड़ने का महत्ती कार्य किया ताकि नई पीढ़ी को अपने देश के महापुरूषों पर गौरव हो सके। उन्होंने विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान ध्यान और योग को महत्ती बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच का विकास हुआ है।

उन्होंने प्रदेश के विद्यालयों में क से कबूतर की बजाय क से कम्प्यूटर, ख से खगोल और ग से गणेश पढ़ाए जाने की पहल करने, पढ़ाई में एसक्यू और ई-क्यू के समावेश से उसे संप्रेषणीय बनाने जैसे कदमों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा समयानुकूल बदलाव से ही शिक्षा की सार्थकता है। शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि बीएड के विद्यार्थियों के लिए 5 माह किसी विद्यालय में पढ़ाना अनिवार्य होता है परन्तु होता यह था कि उसका लाभ पहले वास्तविक रूप में विद्यार्थियों को और स्वयं बीएड अभ्यर्थी को नहीं मिलता था। हमने इस संबंध में संशोधन किया और अब हर बीएड अभ्यर्थी को राजकीय विद्यालय में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका लाभ यह हो रहा है कि भावी शिक्षक का विद्यार्थियों से पहले से तो हुआ तारतम्य तो हुआ ही बल्कि राज्य सरकार को भी 60 से 70 हजार शिक्षक विद्यालयों में पढ़ाने के लिए उपलब्ध हो गए।

उन्होंने समयानुकूल शिक्षा में इस तरह के परिवर्तन को अनिवार्य बताया। उन्होंने ग्राम पंचायताें में उत्कृष्ट एवं आदर्श विद्यालयों की स्थापना, एक साथ 16 हजार समन्वित विद्यालयों की पहल आदि की चर्चा करते हुए कहा कि राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास से आने वाले समय की तस्वीर ही बदल जाएगी।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद रहे शिक्षाविद् श्री महेशचन्द्र शर्मा ने शिक्षा क्षेत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के योगदान की चर्चा करते हुए उनके एकात्म मानववाद के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने शिक्षा में शोध एवं अनुसंधान को सतत जारी रखे जाने पर जोर दिया।

इस मौके पर केशव विद्यापीठ के श्री राजीव सक्सेना, श्री राजेन्द्र शर्मा, इन्दिरा गॉंधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के प्रो. एन.सी.शर्मा, प्रो. एस.के. त्यागी तथा प्राचार्य श्री अशोक सिडानी ने राष्ट्रीय कार्यशाला के महत्व पर विचार रखे।

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