शिक्षा राष्‍ट्रीय एजेंडा है : केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की 64वीं बैठक

The Union Minister for Human Resource Development, Shri Prakash Javadekar addressing the Press Conference on the 64th meeting of the Central Advisory Board of Education (CABE), in New Delhi on October 25, 2016. The Minister of State for Human Resource Development, Shri Upendra Kushwaha, the Minister of State for Human Resource Development, Dr. Mahendra Nath Pandey and the Director General (M&C), Press Information Bureau, Shri A.P. Frank Noronha are also seen.

शिक्षा एक राष्‍ट्रीय एजेंडा है : केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री

केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की 64वीं बैठक

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्‍यक्षता में केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की 64वीं बैठक आज नई दिल्‍ली में आयोजित की गई। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिक्षा एक राष्‍ट्रीय एजेंडा है, जो प्रत्येक व्यक्ति की जिंदगी से काफी गहराई से जुड़ी हुई है।

उन्‍होंने इस बात का भी उल्‍लेख किया कि विगत में हमारा देश विश्‍व भर में ख्‍याति प्राप्‍त शै‍क्षणिक संस्‍थानों की बदौलत जीडीपी और आर्थिक व्‍यापार दोनों ही के लिहाज से विश्‍व स्‍तर पर उल्‍लेखनीय योगदान करता रहा था। उन्‍होंने शिक्षा की गुणवत्‍ता एवं शिक्षण से जुड़े परिणामों में बेहतरी पर ध्‍यान केंद्रित करने की जरूरत को रेखांकित किया।

इस बैठक में अनेक केंद्रीय मंत्रियों जैसे कि कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री राजीव प्रताप रूडी, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय में राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री विजय गोयल, मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ. महेन्‍द्र नाथ पांडेय एवं श्री उपेन्‍द्र कुशवाहा और नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत ने भाग लिया।

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री ने कहा कि कौशल एवं शिक्षा को कुछ इस तरह से आपस में एकीकृत करने की चुनौती हमारे सामने है, जिससे कि पहले से ही सृजित किए जा चुके शै‍क्षणिक ढांचे का अधिकतम इस्‍तेमाल कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करने में किया जा सके। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा कि खेल एवं शिक्षा को निश्चित तौर पर आपसी तालमेल के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए क्‍योंकि इससे बच्‍चों की शारीरिक फिटनेस बेहतर होगी। राज्‍यों के शिक्षा मंत्रियों और केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (केब) के सदस्‍यों ने इस बैठक में हुई चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत ‘अनुर्तीण न करने के प्रावधान’ की स्थिति पर केब की उपसमिति की रिपोर्ट राजस्‍थान के शिक्षा मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने पेश की।

बैठक में कई निर्णय लिये गये जिनमें कुछ कार्य सूची के हिस्‍सा थे और कुछ राज्‍य सरकारों तथा विशेषज्ञों द्वारा जताई गई आशंकाओं से संबंधित थे। निम्‍नलिखित प्रस्‍तावों को अपनाया गया:

(क) अप्रशिक्षित शिक्षकों एवं अनुत्तीर्ण न करने की नीति (नो डिटेंशन पॉलिसी) के विशेष उद्धरण के साथ शिक्षा के अधिकार पर चर्चा की गई। यह चिंता का मुद्दा है कि अध्‍ययन परिणामों में गिरावट आ रही है। इसलिए:

  1. इस पर सहमति जताई गई कि अध्‍ययन परिणामों को संहिताबद्ध किया जायेगा एवं इसे शिक्षा के अधिकार नियमों का एक हिस्‍सा बनाया जायेगा।
  2. इस पर भी सहमति जताई गई कि अध्‍ययन परिणामों में सुधार लाने के लिए सभी हितधारकों को जवाबदेह बनाया जायेगा।
  3. इस पर भी सहमति जताई गई कि केन्‍द्र सरकार उपयुक्‍त संशोधन पेश करेगी जो राज्‍यों को ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ की समीक्षा करने की आजादी देगी।
  4. अगले पांच वर्षों के भीतर अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षण का कार्य पूरा हो जाना चाहिए।

(ख) लड़कियों की शिक्षा के मुद्दे पर विचार करने के लिए तेलंगाना के उप-मुख्‍यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री श्री कदियाम श्रीहरि की अध्‍यक्षता में सीएबीई की एक उप समिति गठित करने का फैसला किया गया।

शिक्षा क्षेत्र में कुछ मुद्दों एवं चिंताओं को रेखांकित करने के लिए अध्‍ययन परिणामों में सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति की बुद्धिसंगत व्‍याख्‍या, राष्‍ट्रीय उपलब्धि सर्वे (एनएएस), कक्षा 10 में अनिवार्य बोर्ड परीक्षा, आनंदपूर्ण शिक्षा, आंगनवाडि़यों को प्राथमिक विद्यालयों के साथ सह-स्थित करने पर संक्षिप्‍त प्रस्‍तुतिकरण की गई।

बैठक में केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकारों के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ-साथ 21 राज्‍यों के शिक्षा मंत्री, 28 राज्‍यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, सीएबीई के सदस्‍य, स्‍वायत्तशासी  संगठनों के प्रमुख, विश्‍वविद्यालयों के उपकुलपति एवं सीएबीई के सदस्‍य सचिव उपस्थित थे।


राजस्थान में तीनों संकायों युक्त राजकीय महाविद्यालय शुरू करने के लिए केंद्र सरकार 1600 करोड़ रुपये का एक मुश्त अनुदान प्रदान करे- उच्च शिक्षा मंत्री

उच्च शिक्षा मंत्री श्री कालीचरण सर्राफ ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) अभियान के अन्तर्गत राज्य में तीनों संकायों से युक्त नवीन महाविद्यालय खोलने के लिए 1600 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान स्वीकृत करने का आग्रह किया है। रूसा के अन्तर्गत केवल 96 राजकीय विद्यालयों, 4 राजकीय संस्कृत, 5 राजकीय विश्वविद्यालयों एवं दो राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालयों को ही अनुदान प्राप्त हुआ है।

श्री सर्राफ मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (केब) की 64वीं बैठक में राजस्थान का पक्ष रखते हुए बोल रहे थे।

उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 289 उपखण्ड़ों में से 30 उपखण्ड़ों में सरकारी या निजी महाविद्यालय नहीं हैं। इसी प्रकार 160 उपखण्ड ऎसे हैं जिनमें सहशिक्षा महाविद्यालय नहीं है। राज्य में महिला शिक्षा के राजकीय महाविद्यालयों से वंचित उपखण्ड़ों की संख्या 248 है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में संचालित 95 राजकीय महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय एवं 84 राजकीय महाविद्यालयों में वाणिज्य संकाय नहीं है। अतः इन महाविद्यालयों में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय प्रारम्भ करने के लिए लगभग 750 करोड़ का एकमुश्त अनुदान स्वीकृत किया जावे। उन्होंने बताया कि प्रदेश की उच्च शिक्षण संस्थायें यथा राजकीय महाविद्यालय, राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय एवं राजकीय विश्वविद्यालय जो यू.जी.सी. के अधिनियम की धारा 12(बी) एवं 2(एफ) के अन्तर्गत मान्यता प्राप्त नहीं है उनकों भी इस नियम में छूट प्रदान करते हुये आधारभूत संरचना में विकास के लिए अनुदान स्वीकृत किया जाना चाहिए।

श्री सर्राफ ने बताया कि आई.आई.आई.टी, कोटा जो वर्तमान में एम.एन.आई.टी., जयपुर के कैम्पस में संचालित की जा रही है के लिए राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क भूमि का आवंटन किया जा चुका है तथा इसमें चार दीवारी का कार्य भी हो चुका है। आई.आई.आई.टी. कोटा को अपने परिसर में संचालित करने के लिए भवन तैयार करवाया जाना आवश्यक है। इसके लिए शत-प्रतिशत बजट केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जावे।

राजस्थान प्रदेश में वर्तमान में 24 राजकीय एवं 44 निजी विश्वविद्यालयों के साथ केवल एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय संचालित है। श्री सर्राफ ने मांग की कि देश के सबसे बड़े भू-भाग वाले प्रदेश में एक और केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्वीकृत किया जाना चाहिए।

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय उच्च शिक्षा परिषद् (रूसा) द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सम्बंधित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को ही आधारभूत संरचना के लिए अनुदान देय होता है, जिसमें केन्द्र राज्य सरकार का सहभागिता 60:40 के अनुपात में है, जिसे राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये 90:10 किये जाने की आवश्यकता है।

राजस्थान प्रदेश में लगभग 82 राजकीय महाविद्यालय ऎसे हैं जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा एन.ए.ए.सी.की मान्यता योग्य नहीं हैं, क्योंकि यह महाविद्यालय आयोग के आधारभूत संरचना के न्यूनतम मानदंड पूर्ण नहीं करते हैं। अतः इन महाविद्यालयों के आधरभूत संरचना विकास करने के लिए केन्द्र सरकार से प्रति महाविद्यालय 10 करोड़ रुपये के हिसाब के लगभग 820 करोड़ रुपये अनुदान दिलाया जाना जरूरी है।

श्री सर्राफ ने बताया कि राजस्थान प्रदेश के जनजाति एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बासंवाडा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों में एक जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। हमारा संकल्प है कि इस क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति को उच्च शिक्षा का अवसर मिले, परन्तु वित्तीय संसाधन सीमित होने की वजह से कठिनाई आ रही है। अतः इस विश्वविद्यालय एवं इस क्षेत्र में संचालित महाविद्यालयों में छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार से एकमुश्त वित्तीय सहायता की जानी चाहिए।


Union HRD Minister chairs 64th meeting of Central Advisory Board of Education

The 64th Meeting of the Central Advisory Board of Education (CABE) was held under the Chairmanship of Union Human Resource Minister Shri Prakash Javadekar on 25th October, 2016 at New Delhi.

In his opening address the Union Minister of Human Resource Development emphasised that education is a national agenda which touches the lives of each and every individual. He also referred that in the past our country had a glorious contribution to the world both in terms of GDP and economic trade because of the world renowned educational institutions. He underscored the need to focus on improving learning outcomes and the quality of education.

The meeting was attended by the Union Ministers, Shri Rajiv Pratap Rudy, MoS (Independent Charge) Ministry of Skill Development & Entrepreneurship, Shri Vijay Goel, MoS (Independent Charge) Ministry of Youth Affairs and Sports, Dr. Mahendra Nath Pandey and Shri Upendra Kushwaha, the Ministers of State for HRD, and Shri Amitabh Kant, CEO Niti Aayog.

The Union Minister for Skill Development and Entrepreneurship pointed out that there is a challenge for integrating skills and education in such a manner that the educational infrastructure which has been already created can be optimally utilized for providing skill based education. There is a need for aligning the NSQF rationally so that skills acquired can enable pursuit of higher education. The Union Minister for Youth Affairs and Sports emphasised that Sports and Education must move in a synchronised manner as this will promote physical fitness of children.

The House deliberated on several aspects of different level of education and how efforts can be made to improve educational levels of the students. The Education Ministers of the States, CABE Members actively participated in the discussions. The report of the CABE Sub – Committee on Measures and suggestions to improve the infrastructure of Government schools was presented Hon’ble Education Minister of Punjab and Chairman of the Sub-Committee Shri Daljit Singh Cheema. The report of CABE Sub-Committee on Status of “No Detention Provision” under RTE Act, 2009 was presented by Prof. Vasudev Devnani, Education Minister of Rajasthan.

A number of decisions were taken at the meeting, in part flowing from the agenda, and in part stemming from concerns raised by the State Governments and experts.  The following resolutions were adopted:-

  1. a) Right to Education was discussed with specific reference to   untrained teachers and No Detention Policy. It was an issue of concern that learning outcomes are deteriorating. Therefore:

(i) It was agreed that learning outcomes should be codified and be made a part of rules of RTE.

(ii) It was also agreed that there has to be accountability of all stakeholders for improving learning outcomes.

(iii) It was further agreed that Central Government may bring in suitable amendment which will give States freedom to review “No Detention Policy.”

(iv) The task of completing the training of untrained teachers should vbe completed within the next 5 years.

  1. b) It was decided to constitute a Sub-Committee of the CABE, under the Chairmanship of Shri Kadiyam Srihari, Deputy CM and Education Minister of Telangana to look into the issues of girl’s education.

A brief presentation on improvement of learning outcomes, Rationalization of posting of Teachers in rural areas, National Achievement Survey (NAS), Compulsory Board examination in Class – X, Joyful learning, Anganwadis to be co-located with primary schools was made to highlight some of the issues and concerns in the education sector.

Education Ministers of 21 States, representatives of 28 States and Union Territories, Members of CABE, heads of autonomous organisations, Vice Chancellors of Universities, and   Shri V.S. Oberoi, Secretary, Department of Higher Education and Member Secretary, CABE were present in the meeting along with senior officials of the Central and State Governments.

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