शिक्षक संघ आंदोलन की राह पर

शिक्षक संघ Shikshak sangh mang pradarshan dharna

राजस्थान शिक्षक संघ(शेखावत) का आह्वान

राज्य सरकार की हठधर्मिता , सार्वजनिक शिक्षा व शिक्षकों से द्वेष्यता और सरकार की शिक्षक एवं जन विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्य व्यापी आन्दोलन को सफल बनाएँ। 23अगस्त 2016 को शिक्षा निदेशालय बीकानेर पर विशाल प्रदर्शन और निदेशालय के घेराव के सहभागी बनो।

प्रमुख मांगे

(1) विद्यालय समयावधि में की गई वृद्धि को वापस लिया जाए और विद्यालयों का समय पूर्व की भाँति निर्धारित किया जाए ।

(2) विद्यालयों को बन्द करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए । एकीकरण के नाम पर बन्द किए गए विद्यालयों की समीक्षा कर पुनः खोला जाए । बालिका विद्यालयों को अन्य विद्यालयों में समायोजित नहीं किया जाए । स्टाफीकरण और समानीकरण के नाम पर समाप्त किए गए पदों की समीक्षा कर पुनः बहाल किया जाए । अतार्किक आधार पर की जा रही पदों की कटौती बन्द की जाए । प्रारंभिक शिक्षा में 120 छात्र संख्या के मानदंड को समाप्त कर समस्त विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक का पद सृजित कर शारीरिक शिक्षक नियुक्त किए जाएं ।

(3) अनिल बोर्ड़िया समिति की रिपोर्ट के अनुसार स्थानांतरण नियम लागू करो । अध्यापक (तृतीय वेतन श्रृंखला) सहित समस्त शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की जाए । प्रतिबंधित जिलों की अवधारणा समाप्त कर प्रतिबंधित जिलों के शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल किया जाए ।

(4) 2012 में नियुक्त शिक्षकों के बकाया ऐरियर के भुगतान पर लगाई गई रोक को हटा कर ऐरियर का अविलम्ब एकमुश्त भुगतान किया जाए । राज्य बीमा (एस. आई.) की कटौती प्रारंभ की जाए और उनका स्थाईकरण किया जाए । समस्त शिक्षकों को हर माह की 5 तारीख से पूर्व नियमित रूप से वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए । वेतन तथा यात्रा भत्ता व चिकित्सा मद में पर्याप्त राशि नियमित रूप से आवंटित की जाए । बजट घोषणा के अनुसार समस्त शिक्षकों का ट्रेजरी से भुगतान सुनिश्चित किया जाए । पंचायत राज विभाग के शिक्षकों के वेतन हेतु एकमुश्त वार्षिक बजट जारी किया जाए।

(5) शिक्षकों का प्रारंभिक वेतनमान केन्द्र सरकार के समतुल्य किया जाए और ग्रामीण भत्ता दिया जाए।

(6) नव चयनित शिक्षकों को नियत(fix) वेतन के स्थान पर नियमित वेतनमान दिया जाए । वेतन विसंगति दूर की जाए और अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पूर्व की भांति परिभाषित पेंशन का लाभ दिया जाए ।

(7) पूर्व में कार्यरत रहे कार्मिकों (विद्यार्थी मित्र, कम्प्यूटर टीचर आदि) की सेवाएं पुनः बहाल की जाए , उन्हें नियमित किया जाए और समायोजित शिक्षकों , पैरा टीचर्स , मां बाड़ी शिक्षा सहयोगियों , मदरसा शिक्षा सहयोगियों , शिक्षा कर्मियों तथा प्रबौद्धकों को सेवा नियम 1971 में समाहित करते हुए पेंशन सहित समस्त लाभ व परीलाभ समकक्ष शिक्षकों के समरूप दिए जाएं ।

(8) समस्त रिक्त पदों को पदोन्नति एवं नव नियुक्ति से शीघ्रातिशीघ्र भरा जाए और पद स्थापन से पूर्व समस्त रिक्त पदों को सार्वजनिक किया जाए । पद स्थापन वरियतानुसार परामर्श तथा पूर्ण निष्पक्षता एवं पारदर्शिता से किया जाए । वाणिज्य, कृषि तथा सामाजिक विज्ञान सहित समस्त विषयों के अध्यापकों को समान रूप से पदोन्नति के अवसर प्रदान किए जाएं । समस्त शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता तथा चयनित वेतनमान का लाभ दिया जाए । पुस्तकालय अध्यक्षो की डीपीसी की जाए ।

(9) शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्यों से पूर्णतया मुक्त रखा जाए । समस्त विद्यालयों में सहायक कर्मचारी और लिपिक का पद सृजित किया जाए ।

(10) वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता पद पर पदोन्नत शिक्षकों सहित समस्त व्याख्याताओं को ए.सी.पी. का लाभ 9,18 व 27 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर दिया जाए।

(11) शिक्षा के निजीकरण व व्यवसायीकरण पर पूर्णतया रोक लगाई जाए। पी.पी.पी. मोड पर राजकीय विद्यालयों को निजी प्रबंधकों को नहीं सौंपा जाए।

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