2 वर्ष लगेंगे विश्वविद्यालयों में सातवां वेतन आयोग लागू होने में

UGC University Grants Commission
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2 वर्ष लगेंगे विश्वविद्यालयों में सातवां वेतन आयोग लागू होने में

यूजीसी पे-कमेटी को करनी पड़ रही मशक्कत

विश्वविद्यालयों में पदोन्नति के लिए लागू किए गए दोनों परफोर्मा बेस्ड अप्रेजल सिस्टम व एकेडमिक परर्फोमेंस इंडीकेटर्स (पीबीएस-एपीआई) अपनी खामियों के चलते पूरे देश में विफल साबित हो गए हैं। इससे सातवां वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए गठित यूजीसी पे-कमेटी को रिपोर्ट देने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। जानकारों का मानना है कि इसके चलते नई सिफारिशों को विश्वविद्यालयों में लागू करने में दो साल का समय लग जाएगा।

पीबीएस- एपीआई की विसंगतियों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2010 से 2016 के दौरान इसके नियमों में यूजीसी को चार बार बदलाव करने पडे़। वीएस चौहान की अध्यक्षता में बनी यूजीसी की 7 सदस्यीय कमेटी को विसंगतियों के चलते सेवा-शर्तों को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सूत्रों के अनुसार मार्च 2017 तक कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश कर पाएगी।

इसलिए होगी देरी

करीब 720 विश्वविद्यालयों में 3 करोड़ विद्यार्थी एनरॉल्ड हैं और 40 हजार महाविद्यालय हैं। विश्वविद्यालयों में 4.50 लाख शिक्षक हैं। आयोग की सेवा शर्तों को लागू करने के लिए यूजीसी कमेटी को इन सबको ध्यान में रखते हुए समानांतर सेवा शर्तों के नियम बनाने होंगे। बार-बार बदलाव वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में सबसे बड़ा रोड़ा है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद पहले इसे केंद्र और बाद में राज्य सरकारों के पास भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब 2 साल का समय बीत जाएगा।
ज्यादा नुकसान शोध में

एपीआई स्कोर व्यवस्था से नुकसान शोध क्षेत्र में हुआ। रिसर्च पेपर, बुक्स, जर्नल्स प्रकाशन में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा गया। हालात यह है कि महज 50 हजार रुपए खर्च कर 100 से 300 अंक एपीआई स्कोर घर बैठे जुटाए जा सकते हैं।


दूर करेंगे विसंगतियों को

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लिए यूजीसी की अलग से कमेटी बनाई है। कमेटी अपना कार्य बेहतर कर रही है। कोई विसंगति है तो उसे दूर लिया जाएगा।

प्रो. इंद्रमोहन कपाई, सदस्य यूजीसी सुखाडिय़ा विवि

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