राज्‍य में 38,625 स्कूली बच्चे नेत्र रोगी

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राज्‍य में 38,625 स्कूली बच्चे नेत्र रोगी

लगातार कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन और इंटरनेट के उपयोग से राजस्थान के बच्चों में नेत्र विकार की समस्या बढ़ती जा रही है। चिकित्सा विभाग की ओर से स्कूल स्क्रीनिंग कार्यक्रम के तहत वर्ष 2015-16 में 6 से 14 वर्ष तक की आयु के 355638 बच्चों की नेत्र जांच की गई। जिनमे से 38625 बच्चों नेत्र रोगी पाए गए। इनमें से 35287 को नि:शुल्क चश्में वितरित किए गए। 2016-17 में 34200 नि:शुल्क चश्मे वितरित किए जाएंगे।

विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सफेद मोतियाएं ग्लूकोमाए आंख में चोट लगने और विटामिन ए की कमी के कारण भी नेत्रहीनता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इतना ही नहीं, प्रदेश की कुल आबादी में से करीब एक लाख लोग नेत्र संबंधी किसी ना किसी गंभीर नेत्र विकार से पीडि़त हैं। प्रदेश में नेत्रहीनता का मुख्य कारणों में सबसे बड़ा कारण मोतियाबिंद है।

नेत्रहीनों में से करीब 64 फीसदी लोग इसके कारण नेत्रहीन हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से संचालित राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में अंधता की वर्तमान दर एक प्रतिशत है। जिसे अब 0.34 प्रतिशत तक लाने का प्रयास किया जा रहा है।

एनजीओ के अस्पतालों को भी पैसा देती है सरकार

स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से संचालित निजी अस्पतालों में आंखों की अन्य मुख्य बीमारियों की चिकित्सा को प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 1500 रुपए तक प्रति केस दिए जा रहे हैं। फिर भी आंकड़े तो देखिए राजस्थान में 11 फीसदी से ज्यादा बच्चे नेत्ररोगों की जद में है।

यहां भी दृष्टि दोष वाले बच्चे चिन्हित

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित 446 मोाबाइल हैल्थ टीमों ने इस ाल अब तक 2115818 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमे से संभावित बीमार 93697 बच्चों को रैफर कर उनकी जांच व उपचार की व्यवस्था की जा रही है।

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