मोदी सरकार बेरोजगारों के लिए एक्‍शन मोड में

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मोदी सरकार बेरोजगारों के लिए एक्‍शन मोड में

मोदी सरकार ने जीएसटी पास होने के बाद अब अपना पूरा फोकस लेबर रिफॉर्म और जॉब पैदा करने पर किया है। सूत्रों के अनुसार सितंबर महीने के अंत में लेबर ब्यूरो के सर्वे आने के बाद सरकार के अंदर चिंता और बढ़ गई है। केंद्र सरकार की ओर से कराए गए इस व्यापक सर्वे में कहा गया था कि देश में बेरोजगारी दर पिछले पांच साल के सबसे उच्च लेवल पर पहुंच गई है।

इस सर्वे से यह बात भी सामने आई थी कि मोदी सरकार की ओर से ‘मेक इन इंडिया’ और दूसरे मोर्चे पर उठाए गए कदम का असर नौकरियों के नए अवसर पैदा करने पर नहीं दिखा है। उलटे उसके कम होने का ट्रेंड दिख गया। इस रिपोर्ट आने के बाद पीएमओ में एक हाई लेवल मीटिंग हुई।

उसके बाद तमाम मंत्रालयों से उनके यहां जॉब के अवसर पैदा करने के लिए उठाए गए कदम और उसके परिणाम के बारे में रिपोर्ट देने को कहा गया है। सूत्रों के अनुसार 13 अक्तूबर को पीएम नरेंद्र मोदी की सभी मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग में यही मुद्दा सबसे अधिक फोकस में रहा। मालूम हो कि विपक्षी दलों ने नौकरियों के अवसर में कमी को मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाने का फैसला लिया है।

लेबर मिनिस्ट्री को रिफॅार्म बिलों को पेश करने का आदेश

सूत्रों के अनुसार पीएमओ ने लेबर मिनिस्ट्री से लेबर रिफार्म से जुड़े तीन लंबित बिल को अगले कुछ दिनों में कैबिनेट से पास करवाकर संसद के विंटर सेशन में भी इसे पास कराने को कहा है। मालूम हो कि पिछले एक साल से तमाम लेबर यूनियन और विपक्ष्री दलों के विरोध के कारण मोदी सरकार लेबर रिफार्म पर आगे नहीं बढ़ सकी थी। सूत्रों के अनुसार जीएसटी के बाद अब सरकार अब इस मुद्दे पर सख्ती से आगे बढ़ेगी।

साथ ही राज्यसभा में स्थिति मजबूत होने के कारण भी सरकार को भरोसा है कि वह इन बिल को पास कराने में सफल रहेगी। सरकार का मानना है कि लेबर रिफार्म से जुड़े बिल के पास होने से खासकर प्राइवेट कंपनियों में नौकरियां बड़े पैमाने पर बढ़ेगी। विंटर सेशन में जिन बिल को पास कराने का कोशिश होगी उनमें कंपनियों के लिए कर्मचारी रखने के बारे में मौजूदा नियम में बड़ा बदलाव करने वाला भी बिल शामिल है। तमाम बड़ी कंपनियों ने सरकार से शिकायत की थी कि मौजूदा लेबर कानून के तहत वह अपने हिसाब से कर्मचारी नहीं रख पाते हैं।

करियर सेंटर को भी सक्रिय करने की कवायद

इसके अलावा मोदी सरकार ने नैशनल करियर सेंटर को पूरी तरह सक्रिय करने का फैसला लिया है। सरकार ने 2015 में नैशनल करियर सेंटर की स्थापना की थी। इस सेंटर में केंद्र सरकार के सभी तरह की नौकरियों के बारे में जानकारी देना अनिवार्य किया गया। इसके लिए बनी विशेष वेबसाइट पर जॉब के लिए युवा अपना नाम रजिस्टर्ड करवाने का अभियान चलाया गया, जिसमें बहुत कामयाबी नहीं मिली।

अब इसे सक्रिय करते हुए सरकारी नौकरियों के अलावा निजी कंपनियां को भी इसमें रजिस्टर्ड कराने को कहा गया है, जिसके माध्यम से नौकिरयां दी जाएंगी। सरकार की योजना है कि अगले कुछ महीनों में लोकल स्तर पर ड्राइवर,प्लंबर जैसी सेवा में भी नौकिरयां बेहतर वेतन के साथ दिलाया जाए।

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