बालिकाओं का गुरुकुल Girls only gurukul

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बालिकाओं का गुरुकुल Girls only gurukul

बालिकाओं का गुरुकुल Girls only gurukul : गुरुकुल के नाम पर हमारे दिमाग में एक ही छवि आती है कि एक दाढ़ी वाले गुरुजी जनेऊ पहने बालकों को पढ़ा रहे हैं, अब आपको अपने मानस में बसी इस छवि को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। इस स्‍थापित छवि को बदलने का सकारात्‍मक प्रयास कर रही है मेरठ की रश्मि अपने छात्राओं के गुरुकुल के माध्‍यम से।

हां, हमारे देश में एक ऐसा गुरुकुल भी है, जहां केवल छात्राएं पढ़ती हैं और उनकी गुरु रश्मि आर्य उन्‍हें वैदिक और आधुनिक शिक्षा के लिए प्रबंध करती हैं।

मेरठ के परीक्षितगढ़ के गांव नारंगपुर आएं तो यहां रश्मि आर्य का गुरुकुल आपको चकित कर देगा। गुरुकुल में आधुनिक और वैदिक शिक्षा का संगम है।

खेल और आत्मरक्षा के साथ संस्कृति में रच बस जाने की लगन है। गुरुकुल की प्रमुख खासियत में से एक कि यहां बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के सभी साधन निशुल्क उपलब्‍ध हैं।

मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जनपद की रहने वाली रश्मि आर्य ने वर्ष 2000 में अपने परिवार को अलविदा कह दिया। कई राज्यों में भ्रमण करने के बाद आखिर में रश्मि परीक्षितगढ़ पहुंचीं और गांव नारंगपुर में वर्ष 2005 में खुले आसमान के नीचे बालिकाओं को पढ़ाना शुरू किया।

रश्मि ने बालिका शिक्षा के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ दान मांगना शुरू किया और वर्ष 2008 में दो कमरों के विद्यालय का निर्माण कर गुरुकुल की नींव रखी। रश्मि की लगन देखते हुए धीरे-धीरे लोग भी उनके इस बालिका शिक्षा के कारवां से जुड़ने लगे। गुरुकुल के प्रति सहयोगियों का समर्पण ही है कि आज श्रीमद् दयानंद उत्कर्ष आस कन्या गुरुकुल का परिसर छह बीघा में फैला हुआ है।

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रश्मि के गुरुकुल में इस समय वहीं रहकर 70 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ उत्तराखंड, हिमाचल, उड़ीसा, बिहार, पश्चिमी बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि राज्यों की बालिकाएं हैं।

गुरुकुल में बालिकाओं को कंप्यूटर के साथ यज्ञ करना भी सिखाया जाता है। भारतीय संस्कृति का ज्ञान और तलवार, लाठी, जूडो, कुश्ती आदि की शिक्षा भी मिलती है। खेल शिक्षा का ही असर है कि गुरुकुल की छात्राओं ने राज्य और राष्ट्रीय की स्पर्धा में मैडल जीते हैं।

अपने सपने को गुरुकुल के रूप में पूरा कर आगे बढ़ रही रश्मि आर्य का कहना है कि कुछ अलग और अच्छा करने की चाह उन्हें इस मुकाम पर ले आई। आज गुरुकुल की बालिकाओं को आगे बढ़ता देख मन का खुशी मिलती है। रश्मि का कहना है कि बालिकाओं की शिक्षा को लेकर समाज के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आ रहा है।

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