बांसवाड़ा : शिक्षकों की कमी पूरी करेंगे बीएड-एसटीसी विद्यार्थी

बांसवाड़ा : शिक्षकों की कमी पूरी करेंगे बीएड-एसटीसी विद्यार्थी

बांसवाड़ा : सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने का काम अब बीएड और एसटीसी का प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थी करेंगे। शिक्षा विभाग की नई पालिसी के तहत बीएड और एसटीसी का प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थियों को अधिकतम 3 माह 22 दिन और न्यूनतम 28 दिन तक किसी किसी स्कूल में बच्चों को बतौर शिक्षक पढ़ाना है। शिक्षक प्रशिक्षण में बच्चों को पढ़ाने का तय समय के अंक भी प्रशिक्षण रिजल्ट में जोड़ें जाएंगे।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नए प्रावधानों में अब एसटीसी और बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश विद्यार्थियों को अब इंटर्नशिप करना होगा। इसके लिए प्रत्येक जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान(डाइट) और समस्त बीएड कॉलेजों को गाइडलाइन जारी प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिसके तहत कॉलेज की ओर से एक पत्र डीईओ को लिखा जाएगा और डीईओ की ओर जिन स्कूलें में रिक्त पद है,वहां पर इन विद्यार्थियों की नियुक्ति की जाएगी।

इस इंटर्नशिप कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ सरकारी स्कूलों को मिलेगा। जहां पर पद रिक्त होने से कोर्स अधूरा रहता है। दूसरी ओर बेसिक पाठ्यक्रम के साथ ही बच्चों का अधूरा पाठ्यक्रम पूरा कराया जाएगा। जिसमें इस पाठ्यक्रम पूरा कराने के लिए अंक दिए जाएगे। एसटीसी में प्रथम वर्ष वाले विद्यार्थियों को 4 सप्ताह का अपने गृह जिले के स्कूल में रहना होगा। वही द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए 16 सप्ताह का स्कूल कार्यक्रम तय किया गया है। प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को 4 सप्ताह और द्वितीय वर्ष के लिए 16 सप्ताह का समय तय किया गया है।

विद्यार्थियों को भी होगा फायदा

इस सिस्टम का दोहरा फायदा होगा। पहला तो यह है कि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी पाठ्यक्रम पूरा कराने में बीएड एसटीसी विद्यार्थियों से काफी हद तक पूरी हो जाएगी।

दूसरा फायदा यह होगा कि विद्यार्थियों को कोर्स पूरा नहीं होने की चिंता नहीं रहेगी,लेकिन साथ ही पढ़ाने वाले बीएड एसटीसी विद्यार्थियों को विशेष अनुभव और पूरे समय के 48 अंक मिलेंगे। जो मुख्य परीक्षा में बतौर प्रेक्टिकल जोड़ें जाएंगे।

बांसवाड़ामें 1500 शिक्षकों की खाली जगहों पर लगाए जाएंगे:दूसरीओर बांसवाड़ा में अब तक 1500 पद खाली है। इन पदों पर ही बीएड और एसटीसी के विद्यार्थियों को लगाया जाएगा।

हालांकि इन विद्यार्थियों की सही संख्या कितनी है,यह जानकारी संबंधित डाइट और बीएड कॉलेजों से नहीं पहुुंंची है। लेकिन सोमवार को डीईओ प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की भीड़ रही। जो अपने अपने कॉलेज से पत्र लेकर आए हुए थे और उन्होंने शैक्षिक प्रकोष्ठ में जमा कराए। ताकि इनके नियुक्ति आदेश जारी किए जा सके।


एमबीबीएसके तर्ज पर एसटीसी और बीएड विद्यार्थियों को स्कूल में भेजने का दोहरा लाभ मिलेगा। एक ओर सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक स्तर की वृद्धि होगी। स्टाफ कम होने से अधूरा पाठ्यक्रम भी पूरा होगा। शिक्षक विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का पूरा ज्ञान मिलेगा। जिससे उनका प्रेक्टिकल नॉलेज बढ़ेगा।

– खुशपाल शाह, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा बांसवाड़ा

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