पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को बस्ते से मिली मुक्ति

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पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को बस्ते से मिली मुक्ति

कोटा : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा दो तक के बच्चों के रोजाना स्कूल बैग लाने पर पाबंदी लगा दी है। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को अब होमवर्क भी नहीं दिया जाएगा।

इतना ही नहीं प्रोजेक्ट से लेकर असाइनमेंट तक अब स्कूल में ही कम्प्लीट कराने होंगे। भारी-भरकम बस्तों के बोझ से बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए शिक्षकों को बच्चों के बैग का नियमित वजन भी लेना होगा।

बोर्ड ने संबद्ध विद्यालयों को सर्कुलर जारी कर कहा है कि वे जबरदस्ती ज्यादा किताबें न खरीदवाएं। कोई भी किताब या वर्कबुक हार्डबाउंड नहीं होनी चाहिए, यानी इनके कवर भी पतले कागज के ही बने हों।

इसके साथ ही बच्चों से रोजाना सारी किताबें मंगवाने के बजाय टाइम टेबल के हिसाब से ही किताबें मंगवाएं। टाइम टेबल इस तरह का बने कि रोजाना स्कूल बैग का वजन एक जैसा हो और बच्चों को कम से कम किताबें लानी पड़ें। यदि कोई बच्चा किताब या कॉपी नहीं लाता तो उसे सजा न दी जाए।

पानी का करें इंतजाम

सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि वह बच्चों के लिए पीने के पानी का पर्याप्त इंतजाम करें। कोई भी बच्चा वॉटर बोटल का वजन न ढोए।

इसके साथ ही खेल सामग्री लाने पर भी पाबंदी रहेगी। स्पोट्र्स डे के दिन बच्चों को स्पोट्र्स ड्रेस ही पहनने दी जाए। अलग से ड्रेस का वजन न उठवाया जाए।

बोर्ड ने स्कूलों को बस्तों का मानक वजन बताते हुए निर्देश दिए हैं कि नियमित तौर पर इसकी जांच की जाए कि बच्चे इससे ज्यादा वजन तो नहीं ढो रहे।

अभिभावकों की जिम्मेदारी भी होगी तय

सीबीएसई ने भारी बस्तों के कारण बच्चों के बिगड़ते स्वास्थ्य के लिए अभिभावकों को भी जिम्मेदार मानाहैं। सीबीएसई ने अभिभावकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि वह बच्चे को स्कूल भेजने से पहले उसका टाइम टेबल और बैग चैक करें।

टाइम टेबल के हिसाब से ही रोजाना स्कूल बैग रीपैक करने की आदत डालें। बच्चे के कंधे पर स्कूल बैग ऐसे बांधें कि उसका वजन दोनों ओर बराबर आए।

पानी की बोतल और स्पोट्र्स किट्स के साथ ही फालतू का सामान बैग में न रखें। पीटीएम में बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर भी शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन से बात करें।

बच्चों में शेयरिंग की आदत डालें

सी बीएसई ने शिक्षकों को सलाह दी है कि वह बच्चों में किताबें शेयर करने की आदत पैदा करें। क्लास में बच्चों के ग्रुप बनाए जाएं और ग्रुप मेम्बर्स बारी-बारी किताबें लाएं।

जिससे बाकी बच्चे स्कूल बैग का भारी-भरकम बोझ उठाने से बच जाएंगे। इतना ही नहीं वर्क बुक की वजाय लूज पेपर का इस्तेमाल करने और किताबों पर निर्भरता खत्म करने के लिए स्मार्ट क्लास का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है।


भारी-भरकम बस्तों की वजह से बच्चों में पैदा हो रहे अस्थि विकार और बीमारियों की रोकथाम के लिए सीबीएसई ने बेहतर कदम उठाया है। स्कूल के साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इनकी पालना निश्चित रूप से होनी चाहिए।
प्रदीप सिंह गौड, सिटी कॉर्डिनेटर, सीबीएसई

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