नेशनल अकादमिक डिपोजिट्री : अकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का डिजिटल संग्रह

The Union Minister for Human Resource Development, Shri Prakash Javadekar addressing a National Conference for Awareness on National Academic Depository, in New Delhi on September 09, 2016. The Minister of State for Human Resource Development, Dr. Mahendra Nath Pandey and the Secretary, Department of Higher Education, Shri V.S. Oberoi are also seen.
The Union Minister for Human Resource Development, Shri Prakash Javadekar addressing a National Conference for Awareness on National Academic Depository, in New Delhi on September 09, 2016. The Minister of State for Human Resource Development, Dr. Mahendra Nath Pandey and the Secretary, Department of Higher Education, Shri V.S. Oberoi are also seen.

नेशनल अकादमिक डिपोजिट्री : अकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का डिजिटल संग्रह

मानव संसाधन विकास मंत्री ने नेशनल अकादमिक डिपोजिट्री के संबंध में जागरुकता के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्धाटन किया

मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज यहां नेशनल अकादमिक डिपोजिट्री (एनएडी) के संबंध में जागरुकता के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्धाटन किया।

श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एनएडी की स्थापना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजीटल इंडिया दृष्टिकोण के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले सभी भागीदारों से आग्रह किया कि वे एनएडी का उपयोग शुरू करने का लक्ष्य 2017 तक पूरा कर लें। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के कारण जीवन में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। श्री जावडेकर ने कहा कि खरीददारी, रेलवे टिकट बुकिंग, बैंकिग और मोबाइल रिचार्ज जैसे क्षेत्रों में भी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह हम समाज में आमूल बदलाव देख रहे हैं।

मंत्री महोदय ने कहा कि वित्तीय प्रतिभूतियों को डी-मैट की प्रक्रिया बहुत पहले से शुरू हो चुकी है और इस तरह निवेशकों की वित्तीय स्थिति सुरक्षित हुई है। इस प्रणाली को अब शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का प्रमाणीकरण भी डिजीटल स्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि संस्थानों को एनएडी प्रौद्योगिकी को अपनाकर उसे वास्तविकता में बदलना चाहिए।

मंत्री महोदय ने मानसिकता में बदलाव, आजमाई हुई और भरोसेमंद प्रौद्योगिकी पर बल दिया और कहा कि इससे पारदर्शिता में इजाफा होगा।

हितधारकों तक कुशल सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रौद्योगिकी के जरिए सरकार प्रशासनिक और अकादिमक सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार अकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों के डिजिटल संग्रह के लिए एनएडी के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। एनएडी इन पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का प्रमाणीकरण करेगी और उनके सुऱक्षित संग्रह को सुनिश्चत करेगी।

अकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों को डिजिटल संग्रह में रखने से शिक्षा संस्थानों, छात्रों और रोजगार प्रदाताओं को ऑनलाइन प्रमाणपत्र आदि जांचने की सुविधा होगी। इसके साथ ही धोखाधड़ी तथा जाली दस्तावेजों से छुटकारा मिलेगा। सभी हितधारकों को एनएडी की ऑनलाइन सुविधा 24 घंटे प्राप्त होगी

मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने माननीय श्री प्रकाश जावड़ेकर के विचारों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि निर्धनतम व्यक्ति की भी अब उच्च शिक्षा तक पहुंच हो गयी है और शैक्षिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने वालों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एनएडी एक आवश्यक उपाय है। डॉ. पांडेय ने कहा कि इस कदम से 21वीं सदी में नया अध्याय खुलेगा।

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव श्री विनय शील ओबेरॉय ने कहा कि एनएडी प्रणाली का प्रमुख सिद्धांत यह है कि हर प्रमाण पत्र और पुरस्कार छात्रों के अलावा हर व्यक्ति को उपलब्ध होगा। इसके लिए छात्रों की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। उन्होंने सभी अकादमिक संस्थानों से आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को अपनाएं।

एनएडी प्रणाली पर एक प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। इसके तहत अकादमिक संस्थानों, छात्रों, प्रमाणीकरण करने वालों और संग्रहकर्ताओं को इसके बारे में जानकारी दी गयी। इस दौरान एनएडी प्रणाली को संचालित करके अपलोडिंग करने का तरीका भी दिखाया गया। इसके बाद प्रश्नोत्तर का सत्र आरम्भ हुआ जिसमें भागीदारों के विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिये गए।

उच्च शिक्षा संयुक्त सचिव ने विभिन्न केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों और राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे प्रस्तुतिकरण में सक्रिय हिस्सा लें। क्षेत्रवार प्रशिक्षण कार्यशालाओं की श्रृखंला आयोजित की जा रही है। आयोजन भागीदारी करने वाले आकादमिक संस्थानों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करके समाप्त हुआ।


A National Conference for awareness on National Academic Depository was inaugurated by Shri Prakash Javadekar, Minister for Human Resource Development in New Delhi today.

Establishment of a National Academic Depository is a step towards the Digital India vision of the Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi, said the Union Minister for Human Resource Development.  The Union Minister called upon all participants to resolve to target year 2017 to roll out use of National Academic Depository. He further added, we are witnessing change here; way of life is changed due to technology. He further stated that technology has become all pervasive in all walks of life, whether it is shopping, booking railways ticket, banking or mobile recharge; we have witnessed a huge transformation in the way we used to function.

The Minister stated that the securities depositories in the country have already made dematerialization of the financial securities and have been ensuring the safety of the financial wealth of the investors. This system can now be replicated for the educational awards. It is high time the academic awards are verified and authenticated, accessed and retrieved in a digital depository. He encouraged the institutions present to change the mindset by welcoming technology in the form of NAD and make it a reality. Union Minister emphasised upon 3 things, change in mindset, absorbing ‘tried, tested and trusted technology’ and thus enhancing transparency and authenticity.

The Government of India is committed towards bringing administrative and academic reforms through the use of technology for delivery of efficient services to all stakeholders. Towards this end, Government intends to establish a digital depository of academic awards to be known as National Academic Depository (NAD) on the pattern of securities depository. The NAD would help in validating the authenticity of these awards and ensuring their safe storage and easy retrieval. Maintaining academic awards in a digital depository would provide benefit to educational institutions, students and employers by enabling online access and retrieval; eliminate fraudulent practices such as forging of certificates and mark-sheets and facilitate validation. NAD would be available online 24X7 access to the stakeholders.

Dr. Mahendra Nath Pandey, MOS (HRD) echoed the views of Hon’ble HRM and added that now even the poorest of the poor are able to seek access to higher education, thereby increasing the number of individuals seeking educational certificates. The need for such a measure as NAD is well established. The initiative, he stated, will be a footprint into a new era of 21st century.

Speaking on the occasion, Secretary (Higher Education), MHRD, Shri Vinay Sheel Oberoi, said that the cardinal principle in the NAD system is for any award to be made available to any person other than student, only with the explicit consent of the student. He also requested all the academic institutions to get on board quickly and requested the participants to disseminate the experience with others involved in the process.

A presentation on NAD model was made by the depositories, wherein they explained the role of various stakeholders viz. Academic Institutions (AIs), students and verifiers and the depositories. A live demo of uploading and lodging the academic awards on the NAD system was also made by the depositories. This was followed by Question & Answer session wherein the various queries/clarifications raised by the participants were addressed.

Joint Secretary (Higher Education), MHRD, requested representatives from various Central higher educational institutions and State public universities participated, to engage actively in the presentations and live demos that followed. A series of training workshops are being organised, region-wise. The event ended with the vote of thanks to the participant academic institutions.

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