धौलपुर : छात्राओं को कहा चुड़ैल

SHIVIRA Shiksha Vibhag Rajasthan
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धौलपुर : छात्राओं को कहा चुड़ैल

छात्राएं बोलीं, छात्रावास अधीक्षक करते हैं अभद्र व्यवहार

धौलपुर : बसेड़ी उपखंड के गांव बौरेली के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक व्याख्याता ने छात्राओं को अपशब्द कह दिए। आक्रोशित परिजन उलाहना देने पहुंचे तो व्याख्याता ने उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया। इसको लेकर घंटों तक हंगामा हुआ।

छात्राओं और ग्रामीणों ने स्कूल में तैनात हिंदी के प्राध्यापक राजन फरसावत की ओर से गलत भाषा का इस्तेमाल किए जाने को लेकर खासा आक्रोश जताया। छात्राओं ने प्राध्यापक फरसावत पर पढ़ाने के बजाय मोबाइल पर फेसबुक और व्हाट्सअप चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्राध्यापक ने उन्हें पढ़ाने के दौरान चुड़ैल,चोट्टी,गोबर के चोथ आदि गलत शब्दों से संबोधित करने के साथ जिंदगी भर चूल्हा जलाने जैसी फालतू बातें कहते हैं। हंगामे की सूचना पर स्कूल पहुंचे काॅपरेटिव बैंक के डायरेक्टर धर्मंेद्र सिंह परमार ने छात्र-छात्राओंको शांत कराते हुए स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों के मध्य बैठक कर समस्या पर चर्चा की तो यहां भी प्राध्यापक द्वारा अपनी गलती मानते हुए अभिभावकों से दुव्र्यवहार किया। जिस पर ग्रामीणों ने खासी नाराजगी जताई और बच्चों और बच्चियों से आगे से दुर्व्यवहार नहीं करने की चेतावनी दी।

हंगामे के दौरान स्कूल प्रिंसीपल गैर मौजूद थे। वहीं 12 कक्षाओं को पढ़ाने के लिए केवल पांच शिक्षक ही स्कूल पहुंचे

प्रिंसीपल कभी टाइम से नहीं आता है और स्कूल हम चलाते हैं

प्राध्यापक राजेंद्र फरसावत ने संस्था प्रधान पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रिंसीपल आज तक तो टाइम से नहीं आया है। उसने हमारे कोई काम करे हैं। यहां बहुत लोग परेशान हैं ये बात जब प्रिंसीपल आए तब करना उनसे। प्राध्यापक न स्कूल संचालन के बारे में कहा कि स्कूल हम चला रहे हैं और हम डेली आते हैं। आज हम लेट हो गए उसमें कोई दिक्कत नहीं है।

साथी शिक्षकों के खिलाफ बोलने लगा आरोपी

ग्रामीणोंऔर स्कूल स्टाफ के मध्य हुई बातचीत के दौरान प्राध्यापक राजन फरसाबत ग्रामीणों से भी उलझ गया। उसने कहा कि मैं तो प्रतिदिन स्कूल आता हूं और आज लेट हुआ हूं। प्रिंसीपल कई दिनों से नहीं रहा उसे कोई कुछ नहीं कहता है। मैं पिछले माह में रोज आने के बाद भी दो दिन का वेतन कटवा के बैठा हूं। जबकि कई शिक्षक लगातार कई दिनों से नहीं रहे हैं। उनका प्रिंसीपल द्वारा किसी भी तरह का कोई वेतन नहीं काटा जा रहा है।

प्राध्यापक ने कहा कि मेरी भाषा शैली ही ऐसी है उसमें में कतई बदलाव नहीं कर सकता। चाहो तो मुझे एपीओ करा दो

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