तबादले : सिफारिश से नहीं अब नीति से होंगे

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तबादले : सिफारिश से नहीं अब नीति से होंगे

शिक्षा विभाग में तबादलों से बैन हटाया गया है और शिक्षक मनचाहे स्‍थानों पर तबादले चाहते हैं, जिस शिक्षक को जहां के लिए अनुकूल सिफारिश मिल जाएगी, वहीं उसका तबादला हो जाएगा, क्‍योंकि किस शिक्षक को कितने समय में कहां पदस्‍थापित किया जाए और कब वह तबादले के योग्‍य है इसके लिए राज्‍य सरकार के पास कोई नीति ही नहीं है।

अब शिक्षा विभाग में शिक्षकों के स्‍थानान्‍तरण के लिए तबादला नीति लागू की जाएगी। इसके तहत ही शिक्षकों के ट्रांसफर होंगे। जनप्रतिनिधियों की डिजायर लगवाकर मनचाहा ट्रांसफर लेने का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

पॉलिसी को लेकर शिक्षक संगठनों और शिक्षाविदों से दो बार सुझाव लिए गए हैं। शिक्षकों ने करीब 700 सुझाव भेजे हैं जिनका परीक्षण चल रहा है। इनमें से कई सुझाव पॉलिसी में जोड़े जा रहे हैं। शिक्षा विभाग की माने तो मार्च 2017 तक पॉलिसी लागू करने की योजना है। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।

अब तक ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए कोई पॉलिसी नहीं होने पर शिक्षकों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था। इसके साथ कई शिक्षक आला अधिकारियों से पहुंच बना कर ट्रांसफर करवा लेते थे। स्थिति ये है कि उपनिदेशक कार्यालय में शिक्षकों की शहर के स्कूल में पोस्टिंग के लिए जनप्रतिनिधियों की सैकड़ों डिजायर आने लगती है।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट के निर्देश के बाद राजस्थान में तबादला नीति बनाए जाने को लेकर कवायद शुरू की गई है।

अभी नेताओं से दबाव बनवा शहर में करा लेते ट्रांसफर

शिक्षकों को मनचाहे स्कूल में ट्रांसफर करने के लिए सांसद, विधायक से लेकर सरकार के मंत्री तक अपने लेटर पैड पर डिजायर करते हैं। ऐसा कई बार होता है जब एक शिक्षक के लिए चार-पांच जनप्रतिनिधि अलग-अलग स्कूलों में पोस्टिंग के लिए डिजायर करते हैं। ज्यादातर शिक्षक शहर व इसके आसपास के स्कूल में ही पोस्टिंग चाहते हैं। इससे प्रभाव ये रहा है कि गांव के सरकारी स्कूल शिक्षकों से खाली हैं और शहर के स्कूलों में स्टाफ भरा हुआ है। गांव के स्कूलों में बच्चों को नुकसान होता है वहां कोर्स पूरा तक नहीं हो पाता।

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