खंडहर में तब्दील हुआ छात्रावास

खंडहर में तब्दील हुआ छात्रावास

केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं अभियान सिर्फ एक नारे तक ही सिमट कर रह गया है। सरकार एक तरफ जहां नारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की सुविधाएं और योजनाएं संचालित कर रही है वहीं दूसरी तरफ बीकानेर शहर में बाहर से आकर पढऩे वाली लड़कियों के लिए रहने की मुलभूत आवश्यकता की पूर्ति भी नहीं की जा रही है। यह हाल है बीकानेर संभाग की सबसे बड़ी महारानी सुदर्शना कन्या महाविद्यालय की है।

जहां पर बीकानेर के आस-पास के गांवों से पढऩे के लिए आने वाली छात्राओं के पढऩे के लिए छात्रावास भी बंद हो गया है। महाविद्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर एक बड़ा व शानदार भवन इन छात्राओं के रहने के लिए बनाया गया था।

लेकिन करीब तीन साल पहले ही इसे बंद कर दिया गया था। छात्रावास के कमरों की चार दीवारी और अन्य भवन भी क्षतिग्रस्त स्थिति में है। इस छात्रावास में जगह-जगह कचरे के ढ़ेर लगे हुए है। छात्रावास के पीछे की दीवार भी जर्जर स्थिति में है।

पहले असुरक्षित घोषित

पीडब्ल्यूडी द्वारा पहले बनाई गई रिपोर्ट में इस छात्रावास को असुरक्षित घोषित किया हुआ था। जिसमें पहले मैप नहीं बनाया गया था। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के सर्वे के बाद अधिकारियों द्वारा सबसे पहले छात्रावास का मैप बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार छात्रावास का आधा हिस्सा सही है और आधा हिस्सा खराब है।

हर महीने कर रहे है हजारों रूपए खर्च

छात्रावास की सुविधा के अभाव में इस महाविद्यालय में पढऩे वाली करीब दो सौ छात्राओं को मजबूरीवश अपने स्तर पर रहने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। छात्राओं के लिए अपने स्तर पर यह व्यवस्था करना महंगा होने के साथ-साथ असुरक्षित भी है। ये छात्राएं महाविद्यालय के आस-पास के घरों में रहना अधिक पसंद करती है ताकि इनको आने-जाने में समय की बर्बादी न हो। छात्राओं के इसी निकटता के मोह के चलते हर महीने भारी भरकम हजारों रूपए किराए का भुगतान करना पड़ता है और इनको अपने चाय-नाश्ते से लेकर खाने की व्यवस्था भी खुद ही करनी पड़ती है।

आधा हिस्सा सही है

छात्रावास का सर्वे करने पर इसका पहले मैप बनाया जाएगा। जो संभवत मंगलवार को पूरा हो जाएगा। छात्रावास का आधा हिस्सा सही है और रहने की स्थिति में है।

पंकज सोलंकी, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी

कॉलेज प्रशासन चाहता छात्रावास शुरू हो

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों द्वारा जो रिपोर्ट दी जाएगी। इस छात्रावास के मेंटिनेंस के खर्चे के लिए तब आगे कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में कई बार पत्र आयुक्तालय भेज चुके है। कॉलेज प्रशासन चाहता है कि इस छात्रावास को शुरू किया जाए।

पुष्पा चौहान, उपप्राचार्य, राजकीय महारानी सुदर्शना कन्या महाविद्यालय

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