केंद्रीय विश्वविद्यालयों के खाली पद शीघ्र भरे जाएंगे

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के तमाम खाली पद शीघ्र भरे जाएंगे

केंद्रीय विश्वविद्यालयों के खाली पद शीघ्र भरे जाएंगे

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के तमाम खाली पद शीघ्र भरे जाएंगे। साथ ही विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा जिस देश के पास अच्छे विश्वविद्यालय होते हैं, वही देश तरक्की करता है। इसी सोच के तहत उनकी सरकार शिक्षा केंद्रों को बेहतरीन बनाने की योजना पर लगातार काम कर रही है।

जावड़ेकर ने यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में कुलपतियों की समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय शोध की गुणवत्ता एवं उत्कृष्ट के केंद्र बनें, इन मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

छत्तीस कुलपतियों ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या किए जा रहे हैं या क्या किए जाएं, इन पर अपने-अपने विचार सांझे किए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में निर्धारित संख्या से 10 से 50 फीसदी शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसे देखते संबंधित कुलपतियों से कहा गया है कि वे जल्द से जल्द तमाम खाली पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करें।

उन्होंने कहा कि तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जरूरी व्यवस्था करने के बाद विद्यार्थियों की संख्या एवं पाठ्यक्रम भी बढ़ाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को गुणवात्ता शिक्षा मिल सके।

जावडेकर ने बताया कि आईआईटी की तरह आईआईएम में भी विद्यार्थियों की सीटें बढ़ाई जाएंगीं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को बेहतर पढाई करने का मौका मिल सके। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि विश्वविद्यालय अध्ययन के केंद्र के साथ-साथ ‘उन्नत भारत अभियान’ का हिस्सा बनकर अपने आसपास के गांवों के विकास में सहभागी बनी। इसके लिए तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने ठोस प्रयास करने का वचन दिया है।

जावड़ेकर ने देश की तरक्की में शिक्षा के योगदान को याद दिलाते हुए कहा कि हजारों साल पहले जब भारत में नालंदा, लक्षशिला एवं विक्रमिशला दुनिया के बेहतरीन शिक्षा के केंद्र थे, तब दुनिया का एक तिहाई व्यापार भारत में होता था।

उन्होंने कहा कि हम अपने महान विश्वविद्यालयों की तत्कालीन शिक्षा प्रणाली से सीख लेते हुए वर्तमान उच्च शिक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार ला सकते हैं। उन्होंने चरित्र एवं मूल्यपरक शिक्षा पर जोड़ देते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की जरूरत है और उनकी सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने बीएचयू के संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की दूर दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय को स्वतंत्रा सेनानियों के आंदोलन एवं पुनर्जागरण के उपकरण के तौर शुरू किया था, जिसमें उन्हें अपेक्षित सफलता मिली थी।

उन्होंने कहा कि लोक मान्य गंगाधर तिलक, महात्मा फूले, डॉ. भीम राव अंबेडकर जैसे महापुरुषों ने शिक्षा के प्रसार के लिए आंदोलन के साथ-साथ शिक्षणा संस्थाएं भी स्थापित की थीं, ताकि आम लोगों शिक्षित हो सकें। उन महापुरुषों से सीख लेते हुए आज शिक्षा के केंद्रों को मजबूत बनाना होगा, तभी देश की वास्तविक तरक्की होगी।

केन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री महेंद्र पांडेय ने प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय वाली शिक्षा प्रणाली जोड़ देते हुए कौशल विकास कार्यक्रमों को समय की मांग बताते हुए कहा कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

बैठक में शिक्षा में अनुसंधान सुधार कार्यक्रम, बुनियादी ढांचे, पाठ्यक्रम विकास, नए-नए पाठ्यक्रम आदि विषयों पर मुख्य रूपए से चर्चा हुई। बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय के समिति कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक को केंद्रीय मंत्रियों के अलावा केन्द्रीय शिक्षा सचिव विनय शील ओबेराय ने भी संबोधित किया। बैठक में शामिल अनेक कुलपतियों ने अपने सुझाव दिए।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश, सचिव डॉ. जसपाल सिंह संधू भी मौजूद थे।

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