और मुश्किल होगी सीए परीक्षा

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और मुश्किल होगी सीए परीक्षा

आने वाले दिनों में सीए बनना अब और मुश्किल होगा। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) सीए एंट्री लेवल परीक्षा को और ज्यादा सख्त करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अभी भी एक लाख छात्रों में से इस परीक्षा को बमुश्किल दस हजार छात्र ही पास कर पाते हैं। इसके साथ ही सीए के सिलेबस में नई कर नीतियों और ग्लोबल एकाउंटेंसी को भी जोडऩे की तैयारी चल रही है।

आईसीएआई बीते एक दशक में लागू हुई नई कर नीतियों को चार्टर्ड एकाउंट के पाठ्यक्रम शामिल करने जा रहा है। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में भी बड़े बदलाव की योजना तैयार कर मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स को सौंपी है।

प्रस्तावित बदलाव के मुताबिक एंट्री लेवल का एग्जाम पहले से ज्यादा कठिन  होगा। नए प्रारूप के मुताबिक परीक्षार्थियों को रेग्युलर ऑब्जेक्टिव (बहुविकल्पी) सवालों के अलावा सब्जेक्टिव सवालों का भी जवाब देना होगा। वहीं फाउंडेशन स्तर पर दो नए पेपर बिजनेस कॉरेस्पॉडेंट एंड रिपोर्टिंग और बिजनेस एंड कमर्शियल नॉलेज जोडऩे की तैयारी है।

इंटरमीडिएट स्तर पर नए विषय के तौर पर इकॉनामिक्स फॉर फाइनेंस जोडऩे का प्रस्ताव है

इसके साथ ही फाइनल ईयर लेवल पर केस स्टडी पर  आधारित ओपन बुक एग्जामिनेशन आयोजित करने की योजना है। केस स्टडी में  रिस्क मैनेजमेंट, इंटरनेशनल टैक्सेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज और कैपिटल मार्केट, ग्लोबल फाइनेंशल रिपोर्टिंग स्टेंड्र्डस, इकॉनॉमिक लॉज और मल्टी डिसिप्लिनरी केस शामिल होंगे।

आईसीएआई इन्फॉर्मेशन सिस्टम कंट्रोल एंड ऑडिट पेपर का नाम बदलकर इन्फॉर्मेशन सिस्टम रिस्क मैनेजमेंट एंड ऑडिट करने जा रही है। जो एडवांस्ड इंटीग्रेटिड कोर्स ऑन इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी एंड सॉफ्ट स्किल्स का हिस्सा होगा।

पाठयक्रम में होगा बदलाव

बीते एक दशक में देश की कर नीतियों में व्यापक स्तर पर बदलाव हुआ है, लेकिन चार्टर्ड एकाउंटेंट की पढ़ाई में इसे अभी तक शामिल नहीं किया जा सका है। आईसीएआई अब भारतीय कानूनों के साथ-साथ वैश्विक स्तर के कर नियमों में भी भारतीय सीए को महारथ दिलाने की कोशिश में जुटा है। इसके लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स और  नए इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम के साथ ही यूनिफार्म ग्लोबल एकाउंटिंग सिस्टम इंटरनेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग स्टेंडर्ड में भी एक्सपर्ट बनाया जाएगा। ताकि दुनिया भर की कंपनियों के फाइनेंशियल स्टेटमेंट और बहीखातों की तुलना आसानी से की जा सके। हालांकि यह बदलाव छात्र, शिक्षक और संस्थानों के साथ ही मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद ही किए जाएंगे।


भेज दिया प्रस्ताव

इंस्टीट्यूट की ओर से बदलावों का प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया गया है। वहां से हरी झंडी मिलते ही इन्हें लागू कर दिया जाएगा।

– प्रमेश गुप्ता, चेयरमैन, कोटा ब्रांच

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