आईटी और कम्‍प्‍यूटर साइंस में अंतर

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आईटी और कम्‍प्‍यूटर साइंस में अंतर

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने प्राविधिक शिक्षा विभाग में कम्प्यूटर साइंस व्याख्याता भर्ती के साक्षात्कार में आमंत्रित कर तीन महिला अभ्यर्थियों को गुरुवार ऐन वक्त पर अपात्र कर बैरंग रवाना कर दिया। क्‍योंकि इन अभ्‍यर्थियों ने बीटेक कम्‍प्‍यूटर साइंस के बजाय आईटी में कर रखा था। यहां सवाल सामने आता है कि आईटी और कम्‍प्‍यूटर साइंस में क्‍या अंतर है ?

अगर एक आम व्‍यक्ति को पूछा जाए तो संभवत: वह इसका उत्‍तर नहीं दे सकता, लेकिन मूल रूप से दोनों विषयों में आधारभूत अंतर यह है कि

आईटी की पढ़ाई कर चुका बंदा कमप्‍यूटर सिस्‍टम इंस्‍टॉल करता है, सॉफ्टवेयर इस्‍तेमाल करता है, नेटवर्क और डाटाबेस को मेंटेन करता है। यानी उसके काम में कम्‍प्‍यूटर और उसकी गणित का सीधा प्रयोग नहीं होता है, वहीं कम्‍प्‍यूटर साइंटिस्‍ट सॉफ्टवेयर डिजाइन और इसके पीछे की गणित पर काम करते हैं।

भले ही दोनों विषय अलग अलग हों, लेकिन एक दूसरे के काफी करीब और परस्‍पर निर्भर है। ऐसे में राजस्‍थान लोक सेवा आयोग की हाल ही की भर्तियों में कम्‍प्‍यूटर साइंस में बीटेक करने वाली छात्राओं को रखना और आईटी वाली छात्राओं को रुखसत कर देना कुछ अजीब लग सकता है, लेकिन तकनीकी रूप से सही है।

सवाल यह भी है कि शिक्षा विभाग सॉफ्टवेयर डवलपमेंट का ऐसा कौनसा प्रोजेक्‍ट शुरू कर रहा है, जहां उसे कम्‍प्‍यूटर साइंटिस्‍ट स्‍तर के विशेषज्ञों की जरूरत पड़ेगी और कम्‍प्‍यूटर साइंस में बीटेक किए हुए अभ्‍यर्थी इस काम में विभाग में मदद कर देंगे।

आयोग की ओर से 10 जनवरी 2016 को प्राविधिक शिक्षा विभाग में कम्प्यूटर साइंस के 46 पदों पर व्याख्याता भर्ती की परीक्षा आयोजित की गई थी। आयोग ने 8 जून 2016 को इसका परिणाम जारी कर चूरू की पूजा वर्मा, अजमेर की संध्या लोहिया और प्रियंका चौधरी को साक्षात्कार के लिए योग्य घोषित किया।

इन अभ्यर्थियों से 20 जून तक विस्तृत आवेदन-पत्र आमंत्रित किए गए थे। इन तीनों ने भी विस्तृत आवेदन-पत्र जमा कराया। आवेदन पत्र की जांच के बाद आयोग ने तीनों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया।

तीनों महिला अभ्यर्थी अपने परिजन के साथ दोपहर 1.30 बजे को साक्षात्कार देने पहुंची। तीनों अभ्यर्थियों को कुछ देर बैठाने के बाद बताया गया कि उन्होंने बी.टेक सूचना प्रौद्योगिकी विषय में किया है। कम्प्यूटर साइंस में बी.टेक नहीं होने के कारण उन्हें अपात्र घोषित किया जाता है।

तीनों अभ्‍यर्थियों ने इसका विरोध किया, लेकिन आयोग प्रशासन ने उन्हें बैरंग लौटा दिया।

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