अभिनव शिक्षा माध्यमिक (कक्षा 6 से 10 )

abhinav Shiksha
abhinav Shiksha

अभिनव शिक्षा माध्यमिक (कक्षा 6 से 10 )

नौ क्षेत्रों पर होगा जोर.

सरल शब्दों में, step by step होगा प्रभावी शिक्षण.

क्योंकि शिक्षा का मूल उद्धेश्य समाज के लिए वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार वांछित नागरिक तैयार करना है.

1. मानवता- एक श्रेष्ठ मानव बनने के लिए किन मूल्यों पर खरा उतरना है ? विद्यार्थी को मानव होने का अर्थ और उद्धेश्य समझाया जायेगा. इस सम्बन्ध में विश्व में अवतरित हुए महापुरुषों के ज्ञान से उन्हें सरल शब्दों में परिचित करवाया जायेगा. इसी से बालक में विलक्षण बनने का भाव जगेगा.

2. सामाजिकता – सामाजिक संबंधों को बेहतरीन तरीके से कैसे निभाना है ? विद्यार्थी को रिश्तों की गहराई में छुपे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक तथ्यों से बारे में अवगत करवाया जाएगा. समाज में तनाव को कम करना होगा और उसे आनंद से भरना होगा. समाज को समृद्ध करना होगा.

3. नागरिकता – अपने देश की शासन व्यवस्था पर कैसे नियंत्रण रखना है ? शासन के सामान्य नियम और कार्यप्रणाली प्रत्येक विद्यार्थी को पता होगी. तभी शासन के निरंकुश होने की संभावना कम होगी और लोकतंत्र मजबूत होगा. तभी विकास की गति और दिशा सही बनी रहेगी.

4. व्यवसायिकता – जीवन और परिवार चलाने के लिए कौनसा व्यवसाय चुनना है ? इसके चुनाव की भूमिका इसी अवस्था में तैयार हो जानी चाहिए. अभिरूचि के अनुसार व्यवसाय का सम्बन्ध बनता है तो जीवन में समन्वय रहता है. कक्षा दस के बाद उसी के अनुरूप ज्ञान और जानकारी दी जायेगी.

5. पर्यावरण – पृथ्वी और सृष्टि को समृद्ध कैसे बनाना है ? पृथ्वी सुन्दर बने और वातावरण शुद्ध बने, इसके लिए हमें मानव जीवन में किन कार्यों को करना है और किन कार्यों को नहीं करना है, इसका भान बचपन से ही हो जाना चाहिए.

6. संस्कृति – अपनी संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्यों को कैसे बचाना है और कैसे बढ़ाना है ? यह हमारी साझी संपत्ति है, जो सदियों से शहद की तरह संजोई गई है. साथ ही हमारे संस्कारों और परम्पराओं की अपनी वैज्ञानिकता है. विद्यार्थी को इनका महत्त्व पता होगा तो वह सहज भाव से उनको अपनाएगा.

7. कला – एक न एक कला की साधना प्रत्येक विद्यार्थी को करनी होगी. अपनी अभिरूचि से वह इसे चुनेगा. कला मानव जीवन का श्रृंगार करती है. संगीत, नाट्य, चित्र, मूर्ति आदि से जुड़ी किसी एक कला को जानना और साधना अभिनव शिक्षा का अंग होगा.

8. खेल – खेल के माध्यम से कई उद्धेश्य पूरे होते हैं. स्वास्थ्य के साथ साथ एकाग्रता, अनुशासन और आत्मविश्वास भी खेल के मैदान से आता है. मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है. तनाव कम होता है. अभिनव शिक्षा में खेल को भी अन्य विषयों की तरह गंभीरता से निखारा जाएगा.

9. स्वास्थ्य – आत्मा के घर यानि शरीर को संभालकर रखे बिना ऊपर की अन्य बातों पर खरा उतरना असंभव हो जाता है. स्वास्थ्य से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी माध्यमिक शिक्षा में विद्यार्थी को सजग कर दिया जाएगा.

इन सभी विषयों को अभिनव माध्यमिक शिक्षा में मुख्य विषयों की तरह रखा जाएगा न कि ऐच्छिक विषयों की तरह. कि जिनको पढ़ना है पढ़ें या कि इनके नंबर नहीं जुडेंगे. इन्हें हल्के में नहीं लिया जाएगा. और इसके लिए शिक्षकों का सघन प्रशिक्षण भी करवाया जाएगा. यह तय कि प्रशिक्षित होते हुए शिक्षक प्रशिक्षण के दौर में ही बदल जायेंगे क्योंकि इन विषयों की बातों का उनके जीवन पर भी गजब का असर होगा.

अभिनव राजस्थान में दसवीं पास विद्यार्थी अपने आगे के जीवन की दिशा और उद्धेश्य चुनने को तैयार होगा.

मेकाले क्या कर गए, उसकी चिंता या आलोचना से कुछ हासिल नहीं होगा. वह गैर-जिम्मेदाराना बहस अब रोकनी है. अब हमें हमारे समाज और देश के हित में अपनी अनुपम शिक्षा व्यवस्था की रचना करनी होगी, उसके लिए जनमत बनाना होगा. हमें ही करनी है. जागरूक नागरिकों को. वर्तमान भारत का कोई नेता या अफसर यह नहीं कर पायेगा और वह यह करेगा भी नहीं. करने का नाटक करेगा या केवल हवा मारेगा.

लेकिन मित्रों, यह काम आसान नहीं है. काफी मेहनत और लगन से होगा. अभिनव राजस्थान में यही होना है. अभिनव राजस्थान और अभिनव भारत हम बनाकर रहेंगे. भारत और इस सृष्टि को बचाने का दूसरा कोई मार्ग नजर नहीं आता है.

वंदे मातरम् !

(अभिनव मित्रों को हमेशा ध्यान रहे कि अभिनव राजस्थान अभियान केवल RTI तक सीमित नहीं है. RTI तो व्यवस्था को जानने का एक माध्यम है, साधन है. हमारा लक्ष्य अभिनव राजस्थान का निर्माण है.)


अभिनव राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था (कक्षा 6 से 10) सरल, प्रभावी, काम खर्च में, विश्वस्तरीय. शिक्षक का सम्मान, पारदर्शी ट्रांसफर नीति, नो नेता ! राजस्थान के प्रत्येक बच्चे को समान अवसर.

अभिनव राजस्थान की अभिनव शिक्षा में माध्यमिक स्कूलें कक्षा छः से दस तक ही होंगी. कक्षा एक से पांच तक प्राथमिक स्कूल होगी. यह आठवीं वाला outdated system नहीं होगा. न ही उच्च माध्यमिक स्कूलों के साथ इस वर्ग के बच्चे बैठेंगे. उच्च माध्यमिक में केवल कक्षा 11 और 12 के छात्र होंगे और उन विद्यालयों की व्यवस्था अलग होगी. उनमें वैकल्पिक विषय होते हैं जबकि माध्यमिक शिक्षा में सभी विषय पढ़ने होते हैं. अभिनव राजस्थान में उच्च माध्यमिक शिक्षा संभाग के विश्वविद्यालय के नियंत्रण में होगी. प्राथमिक शिक्षा वर्तमान की तरह बीकानेर से नियंत्रित होगी और वह बोर्ड प्राथमिक शिक्षा बोर्ड कहलायेगा.

प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा का पूरा नियंत्रण माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के पास होगा. शिक्षक भर्ती से लेकर उनके तबादले और पाठ्यक्रम निर्धारण से लेकर परीक्षाओं तक के काम बोर्ड ही करेगा. बीकानेर का माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और जयपुर की माध्यमिक शिक्षा परिषद बोर्ड में ही merge हो जायेंगे. एक काम के लिए तीन तीन संस्थाओं का क्या काम. बेकार का confusion.

बोर्ड के प्रमुख को महानिदेशक (माध्यमिक शिक्षा) और जिलों के अधिकारी को निदेशक कहा जायेगा. इन अधिकारियों के पास नियमों में लिखे हुए अनुसार शिक्षकों की सेवा से सम्बन्धित सभी अधिकार होंगे. किसी भी प्रकार का नेताई हस्तक्षेप नहीं होगा. स्पष्ट तबादला नीति होगी और प्रत्येक चार वर्ष में एक बार तबादला अनिवार्य होगा. प्रत्येक आठ वर्ष में योग्यतानुसार पदोन्नति (promotion) की व्यवस्था होगी. प्रारंभिक पोस्टिंग छोटे गांव में होगी और पहले प्रोमोशन पर बड़े गाँव-कस्बे या शहर में पोस्टिंग हो जायेगी. अगले प्रोमोशन पर और बड़े शहर में. तबादला यथासंभव अपने मूल निवास के पास होगा. जिले से बाहर केवल शिक्षक की ईच्छा से तबादला हो सकेगा.

शिक्षकों के लिए विद्यालय में शानदार आवास की व्यवस्था होगी. सभी आवश्यक मूल सुविधाओं से सुसज्जित आवासीय परिसर होगा.

सभी विद्यालयों में एकरूपता होगी. अंग्रेजी या हिंदी माध्यम के पाठ्यक्रम में कोई अंतर नहीं होगा. प्रत्येक ढाणी और गाँव में एक वाहन की व्यवस्था होगी जो बालक-बालिकाओं को नजदीक के सरकारी माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय पहुंचायेगा. छात्र संख्या कम होने पर स्कूल नहीं खोला जाएगा. इस वाहन व्यवस्था की जिम्मेदारी पंचायत की होगी.

पाठ्यक्रम में निरंतरता होगी. जैसे गणित कक्षा छः से दस को जाते हुए एक निश्चित क्रम में होगी. हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत बोलने पर जोर रहेगा. इनको अगर बोलना विद्यार्थी को नहीं आया तो अभिनव शिक्षा में कोई अर्थ नहीं होगा. कला और खेल अनिवार्य विषय होंगे लेकिन इनका प्रशिक्षण स्कूल टाइम के अतिरिक्त होगा. इनके लिए अलग से व्यवस्था होगी. इनके शिक्षक भी स्कूल के नियमित समय में नहीं आएंगे बल्कि अपनी अलग व्यवस्था से काम करेंगे.

समाज के लिए आवश्यक व्यवहारिक ज्ञान के निश्चित लक्ष्य होंगे. विद्यार्थी को समाज और परिवार के प्रति समर्पित नागरिक के रूप में विकसित किया जायेगा. हमारे दसवीं पास विद्यार्थी को पता होना चाहिए कि गाय बीमार होने पर क्या करते हैं, खेत की मिट्टी की जांच के क्या फायदे हैं, कपड़े कम पानी में कैसे धोते हैं, छोटे भाई बहनों और बुजुर्गों का ख्याल कैसे रखते हैं.

कृषि और वाणिज्य के विषय अनिवार्य रूप से माध्यमिक शिक्षा का अंग होंगे. इन विषयों के बिना आज के युग के लिए आवश्यक नागरिक कैसे तैयार हो सकते हैं ?

प्रत्येक महीने की एक पुस्तक हुआ करेगी. जैसे अगस्त महीने की पुस्तक में हिंदी-अंग्रेजी-संस्कृत-विज्ञान-गणित आदि विषयों के पाठ होंगे. अगले महीने क्रम से आगे के पथ एक ही पुस्तक में होंगे. बस्ते का बोझ कम हो जायेगा.

एक दिन में एक क्लास को चार अध्यापक ही पढ़ाएंगे. चार अध्यापक-आठ कालांश. एक कालांश पढ़ाई का होगा तो दूसरा कॉपी वर्क का या चर्चा का. क्लास में ही. घर पर कुछ नहीं पढ़ना है. अगले दिन अन्य चार अध्यापक.

प्रत्येक महीने एक टेस्ट होगा. वर्तमान की तरह अर्द्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाएं होंगी. आतंरिक मूल्यांकन पचास प्रतिशत होगा.

बोर्ड वर्तमान की तरह दसवीं की परीक्षा आयोजित करेगा लेकिन कक्षा छः से दस तक की पढ़ाई की व्यवस्था की मोनिटरिंग भी करेगा. अगर आप साल भर की व्यवस्था के बारे में नहीं जानते हो तो कैसे परीक्षा ले सकते हो ?

बोर्ड की दसवीं परीक्षा के आधार पर ही विद्यार्थियों का प्रवेश उच्च माध्यमिक विद्यालयों में होगा.

ऐसी माध्यमिक शिक्षा जो शिक्षक के सम्मान को अत्यधिक महत्त्व देती हो, वही राजस्थान को अभिनव राजस्थान बना सकेगी. जब शिक्षक ठान लेगा तभी अभिनव राजस्थान बनेगा. और शिक्षक सम्मान मिलने पर यह कर दिया करता है. इतिहास झूठ नहीं कहता है.

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