अनूठा है राजस्थान बोर्ड का दीक्षान्त समारोह

राजस्‍थान बोर्ड दीक्षांत समारोह
राजस्‍थान बोर्ड दीक्षांत समारोह

अनूठा है राजस्थान बोर्ड का दीक्षान्त समारोह

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण के लिए किसी एक बालक का निर्माण आवश्यक है। देश का निर्माण करने के लिए समाज के बालकों को किशोरावस्था से ही सही दिशा मिलने से उनका देश के प्रति विचार बलवान हो जाता है। विश्वविद्यालयों के द्वारा दीक्षान्त समारोह पम्परानुसार आयोजित किये जाते हैं। राजस्थान बोर्ड का दीक्षान्त समारोह अनूठा है। ये विचार हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने रविवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के दीक्षान्त समारोह अवसर पर बोर्ड सभागार में कहे।

उन्होंने कहा कि किशोरावस्था के दौरान बने संस्कार स्थाई होते हैं। ये संस्कार जीवन भर के लिए बालक के साथ रहते हैं। देश को समृद्ध बनाने के लिए आधारभूत संरचनाओं से ज्यादा व्यतित्व निर्माण पर जोर दिया जाना चाहिए। देश की समृद्धि भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ती के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। व्यक्तित्व का निर्माण किसी कारखाने में नहीं होता। इसके लिए विद्यालय स्तर पर बालकों को संस्कारित किया जाना आवश्यक है।

शिक्षकोें द्वारा विद्यालय में, कक्षा में जाकर विद्यार्थियों को समुचित अध्यापन करवाने से देश में आने वाली नई पीढ़ी में इच्छानुसार बदलाव लाया जा सकता है। समाज द्वारा सबसेे अधिक फोकस व्यक्तित्व निर्माण पर किया जाना चाहिए। इससे समाज में व्याप्त समस्याओं का समाधान हो जाएगा। आध्यात्मिकता, आत्मियता तथा संवेदनशीलता युक्त व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए शिक्षा की सार सम्भाल आवश्यक है। समाज में समरसता और शान्ति के लिए संस्कार आवश्यक है। वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुसार शहरों और गांवों को भी स्मार्ट बनाया जाना चाहिए।

शिक्षा राज्य मंत्राी प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान बोर्ड देश में छात्रा संख्या के हिसाब से दूसरे स्थान पर है और विश्वास जताया कि बोर्ड के विद्यार्थी गुणात्मक दृष्टि से अव्वल हैं। इसकी कार्यशैली इसे विशेष स्थान प्रदान करती है। राजस्थान में गत दो वर्षांे से शिक्षा का क्रान्ति काल रहा है। राजकीय विद्यालयों का नामांकन तथा परीक्षा परीणाम जबरदस्त बढ़ा है। राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थी बोर्ड की वरियता सूची में अपना स्थान बना रहे हैं।

पाठयक्रम में भारतीय संस्कृति के अनुसार बदलाव किया गया है। राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने के लिए प्रथम स्वाधीनता के संघर्ष से आजादी का इतिहास समाहित किया गया है। भारत के प्रधानमंत्राी के द्वारा आतंकवाद का मुहतोड़ जवाब दिये जाने से ही भारत अपना गौरव पुनः प्राप्त कर रहा है। सरकार ने विभाग में बड़े स्तर पर भर्तियां तथा पदोन्नतियां प्रदान की है। ढ़ाई वर्ष पूर्व के मुकाबले राजकीय विद्यालयों में प्रति विद्यार्थी खर्चा नामांकन वृद्धि के कारण घटकर लगभग आधा हो गया है।

महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पी.सी. चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात विद्यार्थी को समाज तथा राष्ट्र का ऋण चुकाना चाहिए। व्यक्तिगत और पारिवारिक स्वार्थ को त्यागकर समाज के हित साधन में आगे आना चाहिए

बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. बी.एल. चैधरी ने कहा कि दीक्षान्त समारोह में बोर्ड की वर्ष 2012 से 2015 की विभिन्न परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 26 प्रतिभावान विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। समारोह में राज्य और मण्डल स्तर पर चयनित श्रेष्ठ 30 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। स्वर्ण पदक के रूप में 15 ग्राम का स्वर्ण मेडल दिया गया।

बोर्ड द्वारा वर्ष 2012 के पश्चात यह दीक्षान्त समारोह आयोजित हुआ है। गोल्ड मेडल के साथ चार पुस्तकों का एक सेट भी दिया गया। इसमें पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जीवनी पर आधारित पुस्तक अग्नि की उड़ान, प्रोफेसर बी.एल. चौधरी और डाॅ. शंकर चौधरी द्वारा सम्पादित पुस्तक हमारे प्रेरक: स्वामी विवेकानंद और वन्दे मातरम् तथा श्रीमद्भगवत गीता पुस्तकेंं शामिल हैंं।


समारोह में राजस्थान बोर्ड की वर्ष 2012 से 2015 की विभिन्न परीक्षाओं की योग्यता सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 26 परीक्षार्थियों को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया गया

वर्ष 2012 की सीनियर सैकण्डरी परीक्षा के वाणिज्य वर्ग में जोधपुर के मयंक जैन, कला वर्ग में सिंथल (झुंझुनू) की बबली, वरिष्ठ उपाध्याय वर्ग में गोविन्दगढ (जयपुर) के गिरजा शंकर जोशी और प्रवेशिका परीक्षा में गंगापुरसिटी (सवाई माधोपुर) की निधि सिंह को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया गया।

वर्ष 2013 की सीनियर सैकण्डरी परीक्षा के वाणिज्य वर्ग में जयपुर की पारूल गहलोत और डिगारना-जैतारण (पाली) के मुकेश जांगीड, कला वर्ग में सुखरालपुरा (जयपुर) की भारती गौतम, वरिष्ठ उपाध्याय वर्ग में कूपड़ा (बांसवाड़ा) की विपाशा जैन, सैकण्डरी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले गढ़हिम्मतसिंह (दौसा) के रवि खण्डेलवाल और प्रवेशिका परीक्षा में सीकरोरी (भरतपुर) की विजयलक्ष्मी शर्मा को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया।

वर्ष 2014 की सीनियर सैकण्डरी परीक्षा के वाणिज्य वर्ग में भरतपुर के मुदुल सिंघल, कला वर्ग में बांरा की भूमिका शर्मा, वरिष्ठ उपाध्याय वर्ग में बोली (सवाई माधोपुर) की अंकिता शर्मा, सैकण्डरी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कुचामनसिटी (नागौर) के शुभम जैन और प्रवेशिका परीक्षा में थाड़ोली (सवाई माधोपुर) की प्रियंका शर्मा को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया गया।

वर्ष 2015 की सीनियर सैकण्डरी परीक्षा के उदयपुर के कुलदीप सिंह नरूका, वाणिज्य वर्ग में गंगापुरसिंटी (सवाईमाधोपुर) के रजत गोयल, कला वर्ग में कोटा की श्वेता चैबे, वरिष्ठ उपाध्याय वर्ग में खैरथल (अलवर) की सोनाली गुप्ता, सैकण्डरी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली गंगापुरसिटी (सवाईमाधोपुर) की एकता अग्रवाल और प्रवेशिका परीक्षा में खटकड़-अजीतगढ़ (सीकर) के कमलेश कुमार जाट को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया गया।


समारोह में वर्ष 2012 व 2013 में श्रेष्ठ विद्यालय के रूप में राज्य स्तर पर चयनित चार विद्यालयों विद्यालयों के प्रधानाचार्य को बोर्ड द्वारा 50,000/- रूपये का चैक पुरस्कार स्वरूप दिया गया। इसी प्रकार 28 विद्यालयों को मण्डल स्तर पर पुरस्कृत किया गया। इन विद्यालय के प्रधानाचार्य को पुरस्कार के रूप में 40,000/- रूपये की राशि दी जायेगी। उच्च माध्यमिक स्तर पर वर्ष 2012 राज्य स्तर पर अजमेर जिले के सावर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को राज्य स्तर पर श्रेष्ठ राजकीय विद्यालय के रूप में सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. बी. पी. सारस्वत, अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री अरविन्द कुमार संेगवा, राजस्व मण्डल के निबन्धक सुरेश सिन्धी तथा अरविन्द यादव उपस्थित थे।

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