राष्ट्रीय बालिका दिवस – बेटी को बढ़ने दो सपनों की ओर

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राष्ट्रीय बालिका दिवस – बेटी को बढ़ने दो सपनों की ओर

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि समाज में महिलाओं को और अधिक सम्मान मिले और प्रदेश के लिंगानुपात में सुधार आए इसके सामाजिक मानसिकता में बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि बेटियों को जीने का और सुरक्षा का समान अधिकार मिलेगा तो ही समाज को मजबूती मिलेगी। श्रीमती भदेल मंगलवार को बी.एम. बिडला ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि बालिका दिवस मनाना तभी सार्थक होगा जब हम सब यह संकल्प लें कि हम महिलाओं को सम्मान, कुछ करने की स्वतंत्रता देंगे और साथ उन्हें सुरक्षा का भी संबल देंगे। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में महिला लिंगानुपात गड़बड़ाने लगेगा तो आने वाला समय बहुत भयावह होगा।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री राजश्री योजना समेत कई अन्य योजनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं और महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाने के लिए विभाग आरएसीआईटी द्वारा निशुल्क कंप्यूटर कोर्स करवा रहा है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं के परिजनों को आर्थिक रूप से सम्पन्न करने के लिए अमृता हाट का भी आयोजन किया जा रहा है। इन हाट बाजारों को अब संभाग स्तर के अलावा जिला स्तर पर लगाया जा रहा है।

उन्होंने इन अवसर पर राजस्थान को बाल विवाह मुक्त बनाने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकना किसी अकेले का काम नहीं बल्कि एक सामूहिक प्रयास है। इसमें हर तबके की भागीदारी जरूरी है। समाज में जब तक बाल विवाह जनचर्चा का विषय नहीं बनेगा, इस कुरीति को नहीं मिटाया जा सकता।

समारोह में राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा श्रीमती मनन चतुर्वेदी ने कहा कि समाज के हर पुरुष को बतौर भाई, बतौर पिता बालिकाओं की सुरक्षा का जिम्मा उठाना होगा। उन्हें ऎसा सुरक्षित माहौल देना होगा जिससे कि उनका आत्मविश्वास बढ़े, वे स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनें। ऎसी सोच के साथ ही वर्तमान के हालात बदले जा सकते हैं।

महिला एवं बाल विकास सचिव श्री कुलदीप रांका ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि समाज तभी विकासवादी हो सकता है जब लड़के और लड़की का भेद ना रहे। उन्होंने इस अवसर पर सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री राजश्री योजना के लाभ गिनाए, वहीं बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान, बाल विवाह मुक्त राजस्थान, डायन प्रताड़ना और अपराजिता सेंटर के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशक श्री समित शर्मा ने कहा कि बालिकाओं को अपनी क्षमताएं पहचाननी चाहिए।

यूनिसेफ राजस्थान के प्रमुख श्री सैम्युअल्स ने बालिकाओं को खुद में विश्वास जगाने और अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समक्ष बालिका ही सक्षम राजस्थान का निर्माण करती है। उन्होंने इस अवसर पर खूब खेलो, खूब पढ़ो और खूब बढ़ो का भी नारा दिया। यूएनएफपीए के सुनील थॉमस जैकब ने कहा कि राजस्थान में बाल विवाह हालांकि तेजी से कम हो रहे हैं लेकिन फिर भी जो हो रहे हैं उनकी रोकथाम के लिए हर शख्स को जागरूक होना होगा।

इस अवसर पर सुश्री जशोदा गमेती, सोना बैरवा, प्रीति कंवर राजावत, श्री महेन्द्र सिंह चारण, श्रीमती प्रज्ञा भार्गव, सुश्री कृति भारती को गरिमा बालिका संरक्षण एवं सम्मान पुरस्कार 2016-17 और श्रीमती शकुंतला पामेचा, राजन चौधरी और श्रीमती उषा की बालिका संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को 25-25 हजार रुपए के चैक देकर सम्मानित किया।

श्री भदेल ने समारोह के बाद ‘बाल विवाह मुक्त राजस्थान रथ‘ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जयपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में जाकर बाल विवाह के प्रति लोगों में जागरूकता और प्रचार-प्रसार का काम करेगा। समारोह में विभिन्न स्कूलों से आई 1100 से ज्यादा बालिकाएं और विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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