कोटा : सिर्फ डिग्रियां न बांटें, समाज को दिशा भी दिखाएं विवि

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कोटा : सिर्फ डिग्रियां न बांटें, समाज को दिशा भी दिखाएं विवि

कोटा : विश्वविद्यालयों का काम सिर्फ डिग्रियां बांटने या बड़े पैकेज वाली नौकरी हासिल करने वाले छात्र तैयार करने तक सीमित नहीं है। समाज को दिशा दिखाना भी विश्वविद्यालयी शिक्षकों की अहम जिम्मेदारी है। शिक्षा का उपयोग यदि देश और समाज की उन्नति के लिए नहीं हो रहा हो तो वह अपना महत्व खो देते हैं।

उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और प्रमुख चिंतक मधु कुलकर्णी ने व्यक्त किए। आरएसएस के प्रकल्प राष्ट्र चेतना अभियान समिति की ओर से राजस्थान तकनीकि विश्वविद्यालय में मंगलवार को विश्वविद्यालयी शिक्षकों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इसे संबोधित करते हुए कुलकर्णी ने कहा कि अंतर आत्मा का दर्शन एक शिक्षक ही करा सकता है। शिक्षकों को सोचना होगा कि समाज का विकास करने में उन्होंने क्या योगदान किया है। ऐसी पढ़ाई का क्या फायदा? जो भूखे को रोटी और नंगे को कपड़ा न दे सके। उन्होंने कहा कि दुनिया में जितने भी बड़े बदलाव हुए हैं, सभी का केंद्र विश्वविद्यालय ही रहे हैं। इसलिए शिक्षकों को परिवर्तन के लिए आगे आना होगा। कुछ ना कर सकें तो कम से कम दो छात्रों में लीडरशिप, बुद्धिमता और समाज के लिए समर्पण की भावना जगाने का प्रयास कर लें तो देश से अलगाववाद, नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी घटनाएं खत्म हो जाएंगी।

वीएमओयू के कुलपति प्रो. अशोक शर्मा ने कहा कि क्लास में अच्छा छात्र तो तैयार हो सकता है, लेकिन उसे अच्छा इंसान बनाने के लिए समाज की बारीक समझ देनी होगी। कोटा विवि के कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि शिक्षकों में वैचारिक जड़ता ऐसी आ गई है कि सिर्फ अपना रिसर्च पेपर लिखने तक सीमित हो गए हैं। उन्हें वैचारिक संवाद को जगह देनी होगी। आरटीयू के कुलपति प्रो. एनपी कौशिक ने शिक्षाविदों का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए गढऩा होगा। इस दौरान समिति के विभाग संयोजक डॉ. विमल जैन, डॉ. एमएल साहू, डॉ. सुबोध अग्निहोत्री, डॉ. पतंजलि मिश्रा, प्रो. एचडी चारण, प्रो. सीडी प्रसाद, प्रो. प्रवीण माथुर, डॉ. अनिल जैन और प्रो. बीपी सारस्वत समेत कई विश्वविद्यालयों के शिक्षक मौजूद रहे।

शोध पर 35 मिनट बोले राजस्थान विवि के कुलपति

पीएचडी किए बिना ही कुलपति बनाए जाने के बाद विवादों में घिरे राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति जेपी सिंघल भी कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने विश्वविद्यालयी शिक्षकों को 35 मिनट तक शोध की महत्ता पर व्याख्यान दिया। सिंघल ने कहा कि शोध को केवल डिग्री से जोडऩा खतरनाक साबित हो रहा है। शिक्षकों को ऐसे शोध कार्यों से बचना होगा, जो सिर्फ किताबों तक सीमित रह जाए। शोध और अनुसंधान को मानव केंद्रित बनाने पर ही फायदा मिलेगा।

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