उदयपुर : संस्कृत शिक्षा की अवहेलना पीड़ाकारी

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उदयपुर : संस्कृत शिक्षा की अवहेलना पीड़ाकारी

उदयपुर : प्रदेशमें संस्कृत शिक्षा विभाग इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। राज्य में पहली बार ऐसा हुआ है जब बीते तीन साल में ही करीब एक लाख छात्रों का नामांकन घट गया। हालात इतने खराब हैं कि आठ साल पहले राज्य में 2.25 लाख बच्चों का नामांकन था,जो इस वर्ष घटकर एक लाख तक रह गया।

स्कूलों में शिक्षकों के 40 प्रतिशत पद भी खाली हैं। इस साल कई वरिष्ठ उपाध्याय और प्रवेशिका स्कूलों में अभी तक नए प्रवेश नहीं हो पाए हैं जो पहले से अध्ययनरत हैं वे भी टीसी कटवा कर जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में 35 स्कूलों के तो ताले लग चुके हैं। इन हालातोंं की वजह से संभाग के 5 जिलों में प्रवेशिका का परिणाम भी इस वर्ष 50%से कम रहा है। संस्कृत शिक्षा विभाग तो नामांकन रोक पा रहा है और ही नई भर्तियों के लिए उसके पास कोई प्लान है। वर्ष 2008 के बाद से संस्कृत शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई और ना ही विद्यार्थियों के नामांकन बढ़ाने के कोई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। संस्कृत शिक्षा के सेवानियमों में सामान्य विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता बंद किए जाने से भी शिक्षकों में निराशा है।

तीन साल में एक लाख घटा नामांकन

शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश प्रतिनिधि अभयसिंह राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2007-08 में संस्कृत शिक्षा विभाग के कुल 1766 स्कूलों में 227302 बच्चों का दाखिला था, जो वर्ष 2015-16 में घटकर 106471 रह गया है। उदयपुर संभाग में वर्ष 2009-10 में 35 हजार नामांकन था और घटकर 17 हजार रह गया है। प्रदेश में 309 स्कूल सिर्फ एक ही शिक्षक के जिम्मे हैं। जबकि 142 स्कूल में से सिर्फ 1 ही प्रिंसिपल कार्यरत है।


पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त

प्रिंसिपल       142       1          141
एचएम         229      168       52
लेक्चरर        837       426       411
व.अध्यापक    3006     1513     1488
तृतीय श्रेणी    6584     4291     2293
कुल            10798   6399     4385

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