अाबूरोड : छात्रावासों के खेल मैदान विकास से कोसों दूर

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अाबूरोड : छात्रावासों के खेल मैदान विकास से कोसों दूर

अाबूरोड : आदिवासी बहुल आबूरोड ब्लॉक में टीएडी के दर्जनभर छात्रावासों व आवासीय विद्यालय के छात्रावास में खेल मैदान विकसित नहीं होने से बालक-बालिकाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका नहीं मिल रहा है। वे चाहते है कि एथलेटिक्स, बैडमिन्टन, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबाल, तीरंदाजी आदि में कठोर परिश्रम कर जिला व राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाए, पर विकसित खेल मैदानों के अभाव में वे अपने-आपको बेबस महसूस कर रहे हैं।

सरकार ने स्कूलों व छात्रावासों के खेल-मैदान का विकास मनरेगा योजनान्तर्गत करवाने के आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन इनकी पालना नहीं होने से खेल मैदान विकसित नहीं हो रहे हैं। रूचि के अभाव में इन खेल मैदानों को विकसित नहीं किए जाने का खामियाजा जनजाति आश्रम व खेल छात्रावासों तथा आवासीय विद्यालय के छात्रावास में रहकर अध्ययन करने वाले छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

जिला प्रमुख को भेज रखा है प्रस्ताव

आबूरोड स्थित जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के परियोजना अधिकारी ने गत नवम्बर में जनजाति आश्रम छात्रावासों, खेल छात्रावासों व आवासीय विद्यालय में खेल मैदानों के विकास के लिए जिला परिषद को प्रस्ताव भेज रखा है। साथ ही किसी तकनीकी अधिकारी को छात्रावासों में भेजकर तकमीना तैयार करवाने का विकास अधिकारी से आग्रह किया जा चुका है, पर इस दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं हुई। प्रस्ताव में खेल मैदान की भूमि का समतलीकरण, एथलेटिक्स के लिए रेसिंग ट्रेक, बैडमिन्टन के दो कोर्ट, फुटबॉल, वॉलीबाल, कबड्डी व खो-खो तथा तरंदाजी के मैदान के विकास के कार्य शामिल है।

खेल मैदानों के लिए भूमि का नहीं अभाव

ब्लॉक में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग संचालित कुल तेरह छात्रावास है। इनमें सांतपुर के कन्या व बालक खेल छात्रावास व दानवाव का आवासीय विद्यालय छात्रावास भी शामिल है। इन सभी छात्रावासों में खेल मैदानों के लिए कुल 31 बीघा भूमि उपलब्ध है। इसमें आवासीय विद्यालय के छात्रावास की दस बीघा, सांतपुर में बालक खेल छात्रावास की पांच व बालिका छात्रावास की तीन बीघा, तीन छात्रावासों की दो-दो बीघा व सीत छात्रावासों की एक-एक बीघा भूमि शामिल है।

खेल छात्रावासों में ही विकसित नहीं

आश्रम छात्रावासों व दानवाव के आवासीय विद्यालय के छात्रावासों की बात जाने दे तो भी सांतपुर के बालक व कन्या खेल छात्रावास की तो स्थापना ही छात्रों को खेल में पारंगत करने व खेल प्रतिभाओं को निखारने के मकसद से ही हुई है। इसके बावजूद वहां खेल मैदान विकसित नहीं होने से वहां रहने वाले छात्रों का मकसद हल नहीं हो रहा है।


हां, हमें प्रस्ताव तो मिला था, लेकिन आधा-अधूरा होने से हमने उसमें रही कमियों की पूर्ति करने के लिए फिर से टीएडी कार्यालय को भेज दिया। कमी-पूर्ति होकर आने के बाद ही एक्शन प्लान में शामिल किया जा सकेगा।

– कुन्दनमल दवे, बीडीओ, आबूरोड।

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